ALL कविता लेख गीत/गजल समाचार कहानी/लघुकथा समीक्षा/पुस्तक चर्चा दोहा/छंद/हायकु व्यंग्य विडियो
हाइकु-गीत
September 8, 2020 • ✍️टीकम चन्दर ढोडरिया • गीत/गजल

✍️टीकम चन्दर ढोडरिया

बिखरा हुआ 
      चहुँओर सुभग
रूप निहारें।।
 
अंबुज-मुख
      लहराते कुन्तल
ज्यों दल-भृंग।
 
चन्द्र-रश्मियाँ
       मलती उबटन
मृदुल-अंग।
 
मन हरते
    काजर-कलित
दृग- कुआँरे।।
     
मेहंदी वाले
     पग धुले ,झील में
संध्या उतरी।
 
निरख रहे
    दल उडुगन के
बनें प्रहरी।
 
रजनी देखे
     शशि-मुख अपना
नदी किनारे।।
 
घिरी यामिनी
     खोले मनसिज नें
संकोची बन्ध।
 
अधर रचे
    मृदुल देह पर
प्रणय-ग्रन्थ।
 
दृग-उनींदें
   थकित देह पुनः
पिव पुकारे।।
 

अपने विचार/रचना आप भी हमें मेल कर सकते है- shabdpravah.ujjain@gmail.com पर।

साहित्य, कला, संस्कृति और समाज से जुड़ी लेख/रचनाएँ/समाचार अब नये वेब पोर्टल  शाश्वत सृजन पर देखेhttp://shashwatsrijan.com

यूटूयुब चैनल देखें और सब्सक्राइब करे- https://www.youtube.com/channel/UCpRyX9VM7WEY39QytlBjZiw