ALL लॉकडाउन से सीख कविता लेख गीत/गजल समाचार कहानी/लघुकथा समीक्षा/पुस्तक चर्चा दोहा/छंद/हायकु व्यंग्य विडियो
है भरा कल एक... (गजल)
October 17, 2019 • admin

*कमलेश व्यास 'कमल'*

 

है भरा  कल  एक  सीकर हो न हो

ये समां फिर ज़िन्दगी भर हो न हो।

 

तन किराए का महज कमरा समझ

इस जनम में घर मयस्सर हो न हो।

 

ज़िन्दगी भर आपको अपना लगे

क्या पता वो आपका घर हो न हो

 

हो कटीला पर धरातल ही सही

भावना का पार सागर हो न हो।

 

बाअदब  रहना  हमेशा  वक़्त से

वक़्त के हाथों में पत्थर हो न हो।

 

खूब  उड़ता  है  जरा  सी  देर  में

मन के पंछी को लगे पर हो न हो।

 

रूह   की   बातें   करेंगे   रूह   से

बोलने  को ढाई  आखर हो  न हो।

 

है मुनासिब आज का सोचें 'कमल'

आज हैं हम कल यहाँ पर हो न हो।

*कमलेश व्यास 'कमल' उज्जैन

शब्द प्रवाह में प्रकाशित आलेख/रचना/समाचार पर आपकी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया का स्वागत है-

अपने विचार भेजने के लिए मेल करे- shabdpravah.ujjain@gmail.com

या whatsapp करे 09406649733