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हाल,वक़्त की हर तैयारी रखते हैं
September 15, 2020 • ✍️नवीन माथुर पंचोली • गीत/गजल
✍️नवीन माथुर पंचोली
हाल,वक़्त की हर तैयारी रखते हैं।
लोग वही जो ज़िम्मेदारी रखते हैं।
 
रस्ता,दूरी ,मुश्किल,मंज़िल सोच-समझ,
साथ सफ़र के वो हुशियारी रखते हैं।
 
सुनकर,पढ़कर लोग उन्हें समझें-बूझें,
बातें  ऐसी  अपनी  सारी रखते हैं।
 
आते-जाते जीवन के जितने लम्हें,
यादें  उनकी  मीठी-खारी रखते हैं।
 
काम कोई, कब आ जाये तंग मौके पर,
सबसे अपनी दुनियादारी रखते हैं।
 
कहते  तो  हैं वो सब  अपने मन की,
लेक़िन जैसे  बात हमारी रखते हैं।
 
*अमझेरा धार मप्र
 

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