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हाल बेहाल
May 12, 2020 • मीरा सिंह 'मीरा' • कविता


*मीरा सिंह 'मीरा'

टूटी मड़ैया में बैठ
सोच रहा सुखलाल
राम ही जाने कैसे
गुजरेगा यह साल

बुधिया काकी है बीमार
जीना हुआ मुहाल
पापी पेट बन गया
सबके जी का जंजाल

भूख से बिलखे मुनिया
रोटी मिले न दाल
गरीबों से भी बदतर
है मध्यमवर्ग का हाल

लेकर संकट का सैलाब
आया कोरोना काल
कौन लड़ाए हमसे पंजा
ठोक रहा है ताल

कल तक खाते-पीते
आज हुए कंगाल
वायरस मानव जंग में
है सब का हाल बेहाल

गुस्ताखिया इंसान की
बन गई मकड़जाल
तोड़ इसका अब तलक
सका न कोई निकाल

घर में रह काम करें
हम सब बहरहाल
लॉक डाउन में रहना
जरूरी है फिलहाल।

*मीरा सिंह 'मीरा', डुमरांव जिला बक्सर बिहार 

 

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