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ग्रीष्म के हाइकु
April 19, 2020 • अशोक 'आनन' • गीत/गजल

*अशोक 'आनन'
 
धूप ने लिखे -
पसीने से देह पे 
ग्रीष्म के छंद ।
                   *
नावों की पीर -
पांवों में चुभे रेत ।
दिन अंगार ।
                  *
तरस रहीं -
बूंद - बूंद पानी को 
प्यासी नदियां ।
                 *
वैशाख बैठा -
धूप में खोलकर
लू की गठरी ।
                 *
कुएं - बावड़ी -
याद आईं नदियां ।
सूखे का दौर ।
                *
प्यासे अब भी -
याद करते उन्हें ।
खुश हैं कुएं ।
                *
फ़रार हुआ -
हत्या कर कुओं की ।
कुओं से पानी ।
                *
प्यासा सूरज -
पी गया सारा पानी ।
प्यास न बुझी ।
                *
लाज न आए -
सहलाए बदन ।
धूप बेशर्म ।
                *
जलता रहा -
वैशाख अविराम ।
राख न  हुआ ।
                 *
भील कन्या - सी -
सूखके कांटा हुईं ।
ग्रीष्म - नदियां ।
 
*अशोक 'आनन' ,मक्सी,जिला -शाजापुर ( म..प्र.)
 

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