ALL कविता लेख गीत/गजल समाचार कहानी/लघुकथा समीक्षा/पुस्तक चर्चा दोहा/छंद/हायकु व्यंग्य विडियो
घर-घर दुःशासन खड़े
October 2, 2020 • ✍️डॉ. सत्यवान सौरभ • दोहा/छंद/हायकु
✍️डॉ. सत्यवान सौरभ
 
चीरहरण को देख कर,
दरबारी सब मौन !
प्रश्न करे अँधराज पर,
विदुर बने वो कौन !!
★★★
राम राज के नाम पर,
कैसे *हुए* सुधार !
घर-घर दुःशासन खड़े,
रावण है हर द्वार !!
★★★
कदम-कदम पर *हैं* खड़े,
*लपलप करे* सियार !
जाये तो जाये कहाँ,
हर बेटी लाचार !!
★★★
बची कहाँ है आजकल,
लाज-धर्म की डोर !
पल-पल लुटती बेटियां,
कैसा कलयुग घोर !!
★★★
वक्त बदलता दे रहा,
कैसे- कैसे घाव !
माली बाग़ उजाड़ते,
मांझी *खोये* नाव !!
★★★
घर-घर में रावण हुए,
चौराहे पर कंस !
बहू-बेटियां झेलती,
नित शैतानी दंश !!
★★★
वही खड़ी है द्रौपदी,
और बढ़ी है पीर !
दरबारी सब मूक है,
कौन बचाये चीर !!
★★★
छुपकर बैठे भेड़िये,
लगा रहे हैं दाँव !
बच पाए कैसे सखी,
अब भेड़ों का गाँव !!
★★★
 

अपने विचार/रचना आप भी हमें मेल कर सकते है- shabdpravah.ujjain@gmail.com पर।

साहित्य, कला, संस्कृति और समाज से जुड़ी लेख/रचनाएँ/समाचार अब हमारे वेब पोर्टल  शाश्वत सृजन पर देखेhttp://shashwatsrijan.com

यूटूयुब चैनल देखें और सब्सक्राइब करे- https://www.youtube.com/channel/UCpRyX9VM7WEY39QytlBjZiw