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गंगा दशहरा
May 31, 2020 • रामगोपाल राही • कविता

*रामगोपाल राही
 
गंगा तट पर हरिद्वार में ,
श्रद्धालुओं का मेला वहाँ|
जेष्ट शुक्ल दशमी - दशहरा ,
आस्था का मेला वहाँ || 
 
गंगा दशहरा पर्व अनोखा ,
पाप मुक्त कर देता है |
दस  पापों से मुक्ति होती ,
तन मन निर्मल करता है || |
 
गंगा  में स्नान सभी को ,
सचमुच खुशियाँ देता सच  |
तन मन शुद्धि हो स्वच्छता ,
नव ऊर्जा भर देता सच ||
 
उस दिन पूजा विधान सच ,
वहाँ गजब का होता है |
पूजा की हर वस्तु दस दस, 
वहाँ पे रखना होता है ||
 
सभी वस्तुएँ  दान में जाती
सब संग  लेकर आते हैं |
दस ब्राह्मण ले दक्षिणा ,
दाता दे  - %सुख पाते हैं ||
 
कौन-कौन दस पाप से मुक्ति, 
लोग समझ नहीं पाते  |
पर हर्ष आते -गंगा नहाए  ,
लौट घरों को हैंआते ||
   
गंगा अवतरण "तिथि उसी पर ,
गंगा दशहरा है आता |
हरिद्वार में गंगा तट पर ,
मेला भारी  लग जाता  ||
 
गंगा का जय घोष गूँजता  
 गंगा जी के तट वहाँ | 
लाखों लोग लगाते डुबकी  ,
पाप मुक्त हो जाते वहाँ ||
 
साधु व सन्यासी ,गृहस्थी  ,
पुण्य कमाने आते  हैं |
योगी भोगी, रोगी सब ही ,
गंगा नहा हर्षाते हैं ||
 
पाप मुक्त हो जाते पापी, 
कहें मोक्ष व मुक्ति हो  |
आत्ममुग्ध हो  हर्षात सब ,
ध्यान ज्ञान अनुरक्ति हो  ||
 
दान दक्षिणा ,ध्यान अर्चना  ,
होती गंगा मैया की  |
पूजा के संग दीपक जलते ,
 शोभा अनुपम मैया की ||
 
हर की पेड़ी बात न पूछो , 
भीड़ गजब व शोर वहाँ |
 गंगा नहा कर सब श्रद्धालु ,
होते भाव विभोर वहाँ  ||
 
गंगा दशहरा पर्व यहां  ,
लोग अनेकों आते हैं | 
मिनी भारत देख के हर्षे,  ,
सुख आत्मिक पाते हैं ||
             
 गंगा नहाना  व हर्षाना  ,
गंगा दर्शन पाकर के |
गंगा आरती भव्य नजारा ,
लौटें  पुण्य   कराकर के |||
 
आत्मीयता गंगा माँ संग ,
सांँस सांँस में घुलती है |
हर दिल में हो गंगा मैया ,
पावन प्रीत उड़ती है ||  
 
आत्ममुग्धता और आनंद का ,
सुखद नजारा होता है |
लहर लहर दीपक पंक्ति में 
दूर किनारा होता है ||
*रामगोपालराही,लाखेरी
 

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