ALL कविता लेख गीत/गजल समाचार कहानी/लघुकथा समीक्षा/पुस्तक चर्चा दोहा/छंद/हायकु व्यंग्य विडियो
एकजुट रहों,संगठित रहों
May 29, 2020 • सुनील कुमार माथुर
लाॅक डाउन के चलते बहुत कुछ सुना , देखा और समझने को मिला । कोरोना महामारी के चलतें स्वास्थ्य के साथ ही साथ आर्थिक संकट भी भी झेला  महामारी के झटकों के साथ ही साथ थोडे दिन की छुट्टियों, कटौती और छ॔टनी की मार जनता ने झेली वहीं दूसरी ओर इस ऐतिहासिक संकट का सामना करने के लिए हम सभी एकजुट होकर कार्य कर रहें है । इसी के साथ जनता ने बचत करना सीख लिया । युवापीढ़ी को संयुक्त परिवार के महत्व का अहसास हुआ है । परिवार से उन्हें सुरक्षा, सहारा व संबल मिला है । अब वे परिवार से अलग होकर अपने अस्तित्व के बारें में सोच भी नहीं सकतें है और एकल परिवार में रहने वालों को सबक मिला हैं । परिवार के सभी सदस्य एक साथ बैठकर सुबह शाम ईश्वर का स्मरण करते हैं । साथ ही साथ भोजन करते है । हंसी मजाक करने लगें हैं और पुरानी यादों को ताजा कर परिवार की समस्याओं पर चर्चा करने का मौका मिला।कहने का तात्पर्य यह है कि कल की चिंता न करों जिस ईश्वर ने हमें अब तक सम्भाला हैं वह आगें भी संभाल लेगा। बस एकजुट रहों,संगठित रहों।
*सुनील कुमार माथुर ,जोधपुर राजस्थान
 

साहित्य, कला, संस्कृति और समाज से जुड़ी लेख/रचनाएँ/समाचार अब नये वेब पोर्टल  शाश्वत सृजन पर देखेhttp://shashwatsrijan.comयूटूयुब चैनल देखें और सब्सक्राइब करे- https://www.youtube.com/channel/UCpRyX9VM7WEY39QytlBjZiw