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एक राष्ट्र- एक कानून, समानता की बात हो
August 15, 2020 • ✍️अ कीर्ति वर्द्धन • कविता

एक राष्ट्र- एक कानून, समानता की बात हो,
सीमा पर सुरक्षा प्रथम, राष्ट्रीयता की बात हो।
जाति- धर्म- क्षेत्रवाद, आरक्षण को छोड़कर,
गरीब- पिछडे- दीन दुःखी, उत्थान की बात हो।
समान शिक्षा-समान चिकित्सा, हर पेट को भोजन,
लघु उद्योगों का विकास, आत्मनिर्भरता की बात हो।
संस्कार- संस्कृति- सभ्यता, भारत की विरासत रही,
विश्व गुरू फिर भारत बने, बस शिक्षा की बात हो।
समृद्ध- समर्थ- आतंक मुक्त, विश्व का जन जन रहे,
भारत सबसे आगे रहे, जब विश्व नेतृत्व की बात हो।
सर्वे सन्तु निरामया, भावना सदा वेदों ने कही,
आयुर्वेद से जुड़कर बढ़ें, स्वास्थय की बात हो।
भू- गगन- वायू-अग्नि-नीर, पंच तत्त्व से भगवान बना,
पंच तत्त्वों का संरक्षण, जब स्वच्छता की बात हो।
तुष्टीकरण की अब कोई, न कहीं बातें करें,
शिक्षा- रोजगार- नवनिर्माण, बस योग्यता की बात हो।
मानवता सर्वोपरि, सनातन धर्म का संदेश यह,
मानव में मानवीयता मंत्र, जब धर्म की बात हो।
 

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