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एक और बहाना मिल गया
December 2, 2019 • अलका 'सोनी' • कविता

*अलका 'सोनी'*
 
कैंडल्स जलाने का एक और
बहाना मिल गया।
सड़क जाम कर चिल्लाने को
यार, जमाना मिल गया।
 
पूछो जरा जाकर उनसे
क्या गुजर रही है ??
तमाशबीनों को देखने को
एक और तमाशा
मिल गया।
 
अफसाना बन कर रह गया
उनके लिए,
साथ प्यारी बिटिया का अब।
पल- पल पीने को ज़हर
पुराना मिल गया।
 
नाज़ों से पालकर किया
होगा बड़ा उसको भी,
कफ़न आज उसके लिए ही,
सिलाना पड़ गया।
 
 
*अलका 'सोनी'
बर्नपुर, पश्चिम बंगाल
 
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