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एक अहसास है
June 21, 2020 • संगीता श्रीवास्तव सुमन • गीत/गजल
*संगीता श्रीवास्तव सुमन
कैसी तल्खी है क्या फ़जीहत है,  
कैसी गफ़लत है, कैसी नफ़रत है |  
 
मेरी हर साँस देश की ख़ातिर 
तूने सोचा भी कैसे मुहलत है |
 
पार करना नहीं तुझे आसाँ 
हद में रहना मेरी हिदायत है | 
 
नाम लेकर वतन का निकला मैं
आज सरहद पे फिर बग़ावत है |
 
छीलकर गोलियाँ ये तन मेरा  
खाक़ कर दें भी तो इनायत है |
 
अम्न की ख्वाहिशों ने रोका था
यूँ जाँ पे खेलने की आदत है |  
 
है तिरंगा मेरा मुझे प्यारा  
इसके हर रंग की फ़जीलत है  |
 
झूठ धोखे से हम जो हारे 'सुमन' 
फिर न कहना कि ये क़यामत है |
*छिंदवाड़ा मप्र
अकीक़ लफ़्ज़- 
अज़मत - बड़ाई /फज़ीलत - प्रतिष्ठा /ज़लालत - अपमान /इनायत - कृपा 
 

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