ALL कविता लेख गीत/गजल समाचार कहानी/लघुकथा समीक्षा/पुस्तक चर्चा दोहा/छंद/हायकु व्यंग्य विडियो
द्वंद
June 5, 2020 • राजीव डोगरा 'विमल' • कविता

*राजीव डोगरा 'विमल'

अंधेरा बिखरा हुआ है चारों और
एक अजीब सा
सन्नाटा लिए हुए।
फिर भी
क्षितिज के किसी कोने में
रोशनी का जो एक
द्वंद सा चमक रहा है,
वो प्रतीक है
तेरे मेरे अस्तित्व का।
फिर भी वो रोशनी का
है तो एक द्वंद ही न
इसीलिए आपस में लड़ता रहता है,
अपने अस्तित्व की
गहराई को मापने के लिए।
मगर मुझे जाना होगा तुमको
पहचानना होगा खुद को
इस द्वंद से बाहर निकलने के लिए।

*कांगड़ा हिमाचल प्रदेश

अपने विचार/रचना आप भी हमें मेल कर सकते है- shabdpravah.ujjain@gmail.com पर

साहित्य, कला, संस्कृति और समाज से जुड़ी लेख/रचनाएँ/समाचार अब नये वेब पोर्टल  शाश्वत सृजन पर देखेhttp://shashwatsrijan.comयूटूयुब चैनल देखें और सब्सक्राइब करे- https://www.youtube.com/channel/UCpRyX9VM7WEY39QytlBjZiw