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द्वारिका के नाथ
August 12, 2020 • ✍️रामगोपाल राही • कविता
✍️रामगोपाल राही
 
दीन के सहारे प्रभु कष्ट से उबरे प्रभु 
महिमा अनंत हरि द्वारिका के नाथ की |
ब्रह्म पर ब्रह्म  चहूँ लोक परलोक माहीं 
गाथा है अनन्त प्रभु द्वारिका के नाथ की ||
 
गोमती के तट धाम शोभा बड़ी अभिराम ,
ध्वजा है अनोखी प्रभु ,द्वारिका के नाथ की |
गाथा है पुराण कहें ,गीता ,ग्रंथ सारे कहें ,
महिमा ना बिसारे प्रभु द्वारिका के नाथ की ||
 
गोमती के तट तीर -नीर प्रतिबिंम्ब तहाँ
छवि वहाँ निराली हरि द्वारिका के नाथ की |
सुरति  अनोखी तहाँ - मूरति अनोखी तहाँ, 
मन हरि  लेत छटा ,द्वारिका के नाथ की     ||
 
पाप ,शाप ,दुख, मिटे,  मोक्ष को है द्वार तहाँ 
कहते हैं पुराण कथा ,द्वारिका के नाथ की |
रहती ना निराशा मिले ,आशा विश्वास तहाँ
ख्याति त्रिलोक माहीं द्वारिका के नाथ की ||    
 
*लाखेरी ,जिला बूँदी 
 

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