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दुनिया का दुश्मन चीन
June 30, 2020 • अलीहसन मकरैंडिया • कविता


*अलीहसन मकरैंडिया

गन्दी चाले चलने वाले, चीन तुझे है जान लिया !
तेरे हिंसक कुटिल रूप को, दुनिया ने पहचान लिया !!

दानव बन जिंदा जीवों के, रोजाना तू भोज करे,
चमगादड़ जैसे प्राणी से, नया वायरस खोज करे !
कोरोना को शस्त्र बनाके, नये युद्ध हर रोज करे,
अनगिन मानव मरते हैं तू, अहंकार में मौज करे !!
तेरी गद्दारी से जग ने, मान तुझे शैतान लिया !!
तेरे हिंसक कुटिल रूप को, दुनिया ने पहचान लिया !!

जग का शासक बनना तेरा, कई वर्ष का सपना है,
सीधे लड़ना हुआ न संभव, विश्वव्यूह की रचना है !
जर-जमीन दिखती बस तुझको, और न कोई अपना है,
निर्मम हत्याओं का तुझको, पापी पाप भोगना है !!
इसका दंड मिलेगा तुझको, बना विश्व ने प्लान लिया !!
तेरे हिंसक कुटिल रूप को, दुनिया ने पहचान लिया !!

थोड़ी-थोड़ी पड़ोसियों की, धरा रोज तू हरता है,
हांगकांग को क़ब्जाने की, आहें निशदिन भरता है !
'ओली' तेरी करतूतों से, अंदर खाने डरता है,
दो कौड़ी के देश पाक की, मदद खूब तू करता है !!
ऐसे भिखमंगों ने तुझको, दानी माना-दान लिया !!
तेरे हिंसक कुटिल रूप को, दुनिया ने पहचान लिया !!

भारत निर्भर बने स्वयं पर, हर पल यही विचार करें,
अपनी ज़रूरतों का सारा, माल स्वयं तैयार करें !
'मोदी जी' अब 'शि जिनपिंग' से, बंद सकल व्यापार करें,
चीनी निर्मित उत्पादों को, अब सीमा के पार करें !!
अर्थव्यवस्था चौपट चीनी, कर देंगे संज्ञान लिया !!
तेरे हिंसक कुटिल रूप को, दुनिया ने पहचान लिया !!

"हिन्दी-चीनी भाई-भाई", इसमें 'हसन' सुधार करो,
"चीनी जन, जानी दुश्मन" हैं, नव नारा स्वीकार करो !
फड़क उठें वीरों की बाँहें, योद्धाओ ! टंकार करो,
चुन्धे आँख दिखा ना पाएँ, उन पर तेज प्रहार करो !!
ड्रैगन तुझको ठीक करेंगे, हमने मन में ठान लिया !!
तेरे हिंसक कुटिल रूप को, दुनिया ने पहचान लिया !!

छल से वार किएँ हैं तोड़ा, पंचशील के वादों को,
समझ न पाया भारत तेरे, गन्दे घोर इरादों को !
गीदड़ तूने जगा दिया है, सिंहों-से-फौलादों को,
इंच-इंच काटेंगे तेरी, शैतानी औलादों को !!
तेरे घर में घुस मारेंगे, जुटा नया सामान लिया !!
तेरे हिंसक कुटिल रूप को, दुनिया ने पहचान लिया !!

डोकलाम में भागे थे तुम, इतने भी बलवान नहीं,
सड़सठ में तुम हार गए थे, क्या इसका भी भान नहीं ?
बासठ-बासठ चिल्लाते हो, भारत अब नादान नहीं,
बम की धमकी से डर जाए, ऐसा हिन्दुस्तान नहीं !!
चीन तुझे बरबाद करेंगे, दूर तलक संधान लिया !!
तेरे हिंसक कुटिल रूप को, दुनिया ने पहचान लिया !!

बात नहीं सरहद पर कोई, अब तो केवल रण होगा,
गूँज उठेंगी दशों दिशाएँ, समर महा भीषण होगा !
चीनी चूहे सुन ले तेरा, गलवन घाट मरण होगा,
तेरे कुत्सित मंसूबों का, निश्चित अब तर्पण होगा !!
तू झूठा-मक्कार-धूर्त है, सारे जग ने मान लिया !!
तेरे हिंसक कुटिल रूप को, दुनिया ने पहचान लिया !!

जितने वीर शहीद हुएँ हैं, अब उनका सम्मान करो,
शस्त्र उठाओ वीर सैनिकों, रिपु का शोणित पान करो !
सीमाएँ सब रहें सुरक्षित, दुश्मन को हलकान करो, 
"भारत माँ" की चहुँदिश जय हो, वंदेमातरम गान करो !!
कायर चीन धूल चाटेगा, प्रण हर एक जवान लिया !!
तेरे हिंसक कुटिल रूप को, दुनिया ने पहचान लिया !!

*विद्युत नगर टाऊनशिप,
जिला- गौतम बुद्ध नगर

 

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