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डॉ. धींग ने बनवाई महाप्रज्ञ और नानेश की कावड़ 
January 25, 2020 • शब्द प्रवाह समाचार • समाचार


चेन्नई।  अंतरराष्ट्रीय प्राकृत अध्ययन व शोध केन्द्र के निदेशक डॉ. दिलीप धींग की प्रेरणा से आचार्य महाप्रज्ञ और आचार्य नानेश की जन्म शताब्दी (2019-2020) के उपलक्ष्य में कावड़ बनाई गई है। लोकसंस्कृति के वरिष्ठ विद्वान डॉ. महेन्द्र भानावत ने बताया कि मेवाड़ के काष्ठ कलाकार मांगीलाल मिस्त्री द्वारा निर्मित इन कावड़ों में दोनों आचार्यों की जीवन-झाँकी चित्रित है। काष्ठ से निर्मित कावड़ लघु देवालय जैसी होती है। लकड़ी का यह छोटा-सा मंदिर आस्था का प्रतिरूप और कला का लोक-कीर्तिस्तूप होता है। कावड़ के पड़ खोलते हुए संत के जीवन को बताया जाता है, इसे ‘कावड़ बाँचना’ कहते हैं। राजस्थान में मेवाड़ की काष्ठकलाओं में कठपुतली की तरह कावड़ भी बहुत लोकप्रिय रही है। साहित्यकार डॉ. दिलीप धींग ने कहा कि लोककला को प्रोत्साहित करना वक्त की जरूरत है। हस्तशिल्प में अनुभूति का स्पर्श होता है। पिछले दिनों उदयपुर में डॉ. भानावत ने डॉ. धींग को ये कावड़ें भेंट कीं। डॉ. धींग ने आचार्य नानेश की कावड़ समता युवा संघ, बम्बोरा के पूर्व अध्यक्ष सुरेशचन्द्र धींग को भेंट की। वे आचार्य नानेश की कावड़ राजस्थान में चिŸाड़गढ़ जिलांतर्गत उनकी जन्मस्थली दांता (नानेशनगर) स्थित संग्रहालय में समर्पित करना चाहेंगे। इसी प्रकार डॉ. धींग आचार्य महाप्रज्ञ की कावड़ आचार्य महाश्रमण को समर्पित करने की इच्छा रखते हैं।  डॉ. धींग ने कहा कि उनकी आचार्य हस्ती दीक्षा शताब्दी (2020-21) के उपलक्ष्य में आचार्य हस्ती की कावड़ बनाने की भावना है। डॉ. भानावत ने डॉ. धींग की मौलिक रचनाधर्मिता और समन्वय दृष्टि की सराहना की। 

 
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