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दिल से दिलों के तार मिलाती है बेटियाँ
February 7, 2020 • पुखराज जैन पथिक • कविता

*पुखराज जैन पथिक

दिल से दिलों के तार मिलाती है बेटियाँ ,

सपनें अधुरे, कुल के सजाती है बेटियाँ ।

कम नहीं जमाने बेटियाँ ये जान लो,

दीपक सा मान मिलता पूजाती है बेटियाँ 

कोसो न बेटियों को उनका है जमाना ,

आने वाली पीढ़ी  बनाती है बेटियाँ ।

भ्रूण को कोख मे यूं ही न मिटाओ ,

कुदरत का ये उपहार कहाती है बेटियाँ

दो कुल को एक डोर मे बान्ध रखे ,

दोनों घर का मान बढा़ती है बेटियाँ ।
 
*पुखराज जैन पथिक, नागदा (उज्जैन)