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दिल दुखाती ही रही उस बात का अंतिम पहर है
September 7, 2020 • ✍️कैलाश सोनी सार्थक • गीत/गजल

✍️कैलाश सोनी सार्थक

दिल दुखाती ही रही उस बात का अंतिम पहर है
गम भरी मेरे सनम बरसात का अंतिम पहर है

बेवफाई की खलिश अब थाम ले अपने कदम तू
दिल पे करती रोज मेरे घात का अंतिम पहर है

वक्त भी इक चीज है जीने को सबके वास्ते सुन
ऐ गमों तेरे रचे हालात का अंतिम पहर है

दिन तुम्हारे प्यार की चाहत लिये घूमा हमेशा
मान जा अब तो सनम,इस रात का अंतिम पहर है

दी रज़ा रब ने खुशी भरपूर पाई जी ले उसको
आज खुशियों से भरी सौगात का अंतिम पहर है

थी मेरी कमजोरियाँ लानत तभी तुमसे मिली थी
दी सदा तुमने मुझे उस मात का अंतिम पहर है

आई लेने जिंदगी के ख्वाब सारे खत्म करने
सुन जरा ऐ मौत इस बारात का अंतिम पहर है

रात है नाराज तुझसे ऐ सहर ढलना तुझे अब
रात कहती जा तेरी औकात का अंतिम पहर है

प्यार के हर लफ़्ज ने सोनी मिटाया नफरतों को
नफरतों के छाए हर जज्बात का अंतिम पहर है

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