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धरा की अनंत पीड़ा
April 22, 2020 • प्रीति शर्मा 'असीम' • कविता
 
 
 
 
 
 
 
*प्रीति शर्मा 'असीम'
 
विश्व धरा ने युगों -युगों से ,
अनंत पीड़ा सही।
जीवन दिया ,
पोषण किया। 
पालक होकर भी,
पतित रही ।
 
अपनी ही संतानों का,
संताप हर ,
अनंत संताप सहती रही ।
 
विश्व धरा ने युगों -युगों से,
अनंत पीड़ा सही ।
 
स्वर्णनित उपजाऊ शक्ति देकर ,
भूख मिटाई दुनिया की , 
पर अपने संतानों की लालसा से,
उनके लालच से बच ना सकी।
 
 विश्व धरा ने युगों- युगों से,
अनंत पीड़ा सही।
 
अपनी सारी सुंदरता देती रही। 
और अपनी ही संतानों से, 
करूपित होती रही ।
 
गंदगी के ढेरों को सहती रही। 
अमूल्य धरोहरों को देकर ,
प्रदूषण से सांसे घुटवाती रही।
विश्व धरा ने  युगों -युगों से,
अनंत पीड़ा सही।
 
इंसानो की गलतियों से,
जब रुौद्र रूप लेती।
सबकी गलतियों की सजा,
खुद ही सह लेती।
 
आज विश्व धरा दिवस पर ,
संकल्प ले......
कोरोना की आपदा 
जो कुछ 
लालची इंसानों ने बनाई।
 
किस तरह विरान कर दी धरा। 
मौत से कैसे धरा आज कंप कंपाई।
 
*प्रीति शर्मा 'असीम'
नालागढ़ हिमाचल प्रदेश

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