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चिर अटल अटलजी
August 16, 2020 • ✍️अशोक 'आनन' • कविता
                           
✍️अशोक 'आनन'
 
अटल  आप ,  चिर - अटल   अटलजी !
काव्य - कर्म   आप   सफल  अटलजी !
इस   माटी   पर   हैं   जो  ऋण  आपके -
उनसे    हो  सकते  न  उऋण अटलजी !
 
यादें    ही    अब   शेष    रहीं  अटलजी -
बगिया   उनसे   महक  रही   अटलजी !
यादों   में   अब  जन - जन   की  आंखें -
मेघों - सी   बस  छलक  रहीं  अटलजी !
 
हर   घर    में   जन्मे   अटल   अटलजी !
कर्म   हो   जिसके  हर  धवल  अटलजी !
यश   जिसका   फैले   दिनमान  सरीखा -
सुबह - शाम    फिर    नवल    अटलजी !
 
चंदन -  सी    महके     माटी    अटलजी !
वृंदावन - सी   हो   भू   पवित्र   अटलजी !
गूंजें   चहुंओर   सदा  कविताएं   आपकी -
मीरा   के   गीत - भजन -  सी   अटलजी !
 
देश - हित  ही  था  नयन - स्वप्न अटलजी -
लोकतंत्र का न  कुम्हलाए प्रसून अटलजी !
मानवता  का  हो  न अवमूल्यन  कभी भी -
नैतिकता  का  हो   नव - सृजन  अटलजी !
 
*मक्सी,जिला - शाजापुर ( म.प्र.)
 

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