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छोड़ रहा न साथ कोरोना
May 12, 2020 • रामगोपाल राही • कविता

*रामगोपाल राही

छोड़ रहा न साथ कोरोना  ,
मुश्किल है  हर बात कोरोना  |
लॉकडाउन ने सब कुछ छीना ,
बिगड़ रहे हालात कोरोना ||
 
मिलती नहीं उधार कोरोना ,
अब तो जाओ पधार कोरोना | 
हम मजदूर सुने ना कोई ,
कोई भी  सरकार कोरोना ||
 
लॉकडाउन का द्वंद कोरोना ,
रुपए पास ना चंद कोरोना |
रोजगार ठप्प गई मजूरी ,
रोजी रोटी बंद कोरोना ||
 
लॉकडाउन की मार कोरोना ,
कब से हैं बेकार कोरोना |
अपने घर से दूर राह में ,
भूखे हैं बेजार कोरोना ||
 
सबके हृदय मलाल कोरोना ,
जन-जन है बेहाल कोरोना |
हम प्रवासी -घर को निकले  
विषम मौत का जाल कोरोना ||
 
अब  खुले बाजार कोरोना ,
हलचल की भरमार कोरोना |
भूल के सब कुछ व्यस्त हो गए ,
जिनके थे व्यापार कोरोना ||
 
बदले शादी  ढंग कोरोना ,
पांच आदमी संग कोरोना |
पंण्डित ने फेरे करवाऐ ,
हुई दुल्हनियाँ संग कोरोना ||
 
अब रक्षक भगवान -कोरोना ,
मालिक बक्क्षे जान  -कोरोना | 
दूरी रखना बहुत जरूरी  ,
दवा यही विधान कोरोना ||
 
अस्पताल निदान कोरोना ,
मुश्किल में इंसान कोरोना |
बहुत समय तक अस्पताल में ,
अटके भटके प्राण कोरोना ||
 
क्रूर ले रहा प्राण कोरोना ,
लोग सभी हैरान कोरोना |
जब से आया देश में मेरे ,
निर्दयी बेईमान कोरोना ||
 
मरना ना आसान कोरोना ,
शव में विद्यमान कोरोना |
जले ठीक से ना दफनाए ,
डर में हर इंसान कोरोना | 
               
*रामगोपाल राही लाखेरी
 

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