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छठवीं इन्द्रिय
September 22, 2020 • ✍️राजेंद्र श्रीवास्तव • लेख

✍️राजेंद्र श्रीवास्तव

सिक्स्थ सेन्स के बारे में हमने कई बार सुना है,जिसे सरल भाषा में छठवीं इन्द्रिय कहते हैं वैसे तो इंसान की पाँच इन्द्रिय होती हैं,नेत्र,नाक,जीभ,कान और त्वचा।इन्ही को दृष्टि,सूँघने की शक्ति, स्वाद  पहचान ने  की शक्ति,सुनने की शक्ति और स्पर्श कहा जाता है।किंतु एक छठवीं इन्द्रिय भी होती है,जो दिखाई नहीं देती,लेकिन उसका अस्तित्व महसूस होता है।यह मन का केंद्र बिन्दु भी हो सकता है या भृकुटि के मध्य स्थित आज्ञा चक्र जहाँ तो सुषुम्ना नाड़ी आती है।

यह इन्द्रिय सभी में सुप्तावस्था में होती है।भृकुटि के मध्य निरंतर और नियमित ध्यान करते रहने से आज्ञाचक्र जागृत होने लगता है जो हमारे सिक्स्थ सेन्स को बढ़ाता है।वैज्ञानिक कहते हैं किहम अपने दिमाग़ का 15% से 20%  काम में लाते हैं।हम ऐसे पोषक तत्व ग्रहण नहीं करते जो मस्तिष्क को लाभ पहुँचा सके,तब प्राणायाम ही एक उपाय बचता है,जिससे फेफड़ों और। हृदय के करोणों वायुकोषों तो हवा पहुँचती है,जिससे वे जागृत होते हैं।

छठवीं इन्द्रिय का जागृत होना व्यक्ति के आध्यात्मिक होने की निशानी है।आप भी कुछ ऐसे लोगों से मिले होंगे जो कहते हैं कि कुछ अच्छा या बुरा होने वाला उन्हें पहले पता लग जाता है या जो कहते हैं कि उनका सपना सच होता है। हो सकता है कि उनकी बातों को आपने अनदेखा कर दिया हो,लेकिन वास्तव में यह उनकी मानसिक क्षमता की एक विशिष्ट ख़ूबी को इशारा करती है,इसे ही दूरदर्शी दृष्टि होना कहते हैं।

प्राणायाम सबसे उत्तम उपाय है,छठवीं इन्द्रिय जागृत करने का। सम्मोहन विद्या भी सरल उपाय है,पर इसके ख़तरे भी हैं।त्राटक क्रिया से भी छठवीं इन्द्रिय को जागृत कर सकते हैं आप बिना पलक झपकाए किसी एक बिंदु या दीपक की ज्योति पर देखते रहिए,इसके बाद आँखें बंद करके ध्यान करें।कुछ समय तक इसका अभ्यास करने से छठवीं इन्द्रिय जागृत होने लगेगी।

भृकुटि पर ध्यान लगाकर अपने स्वाँस के आवागमन पर ध्यान दें।मौन ध्यान और साधना मन और शरीर को मज़बूत करती है।मौन से मन की क्षमता का विकास होता जाता है जिससे कल्पना शक्ति और आभास करने की क्षमता बढ़ती है।इसी के माध्यम से पूर्वाभास और साथ ही इससे भविष्य के गर्भ में झाँकने की क्षमता भी बढ़ती है।यही छठवीं इन्द्रिय के वीकाद की शुरुआत है।

वैज्ञानिकों ने अपने अध्ययन में स्पष्ट किया है कि छठवीं इन्द्रिय का जागृत होना  एक वास्तविकता है,जो हमें किसी घटित होने वाली घटना का पूर्वाभास कराती है।होशोहवास में आया हुआ विचार या कई बार सपने में मिला संदेश हमें कुछ घटित होने का आभास कराती है।

छठवीं इन्द्रिय का सबसे साधारण अनुभव है,हम अलार्म बजने से पहले उठ जाते हैं,क्योंकि जागने के समय का अलार्म हमारे मस्तिष्क ए स्वतः भर जाता है।यदि हमें इस बात का आभास होता है कि हमारे पीछे कोई चल रहा है,या दरवाज़े पर कोई खड़ा है या ख़ासतौर पर महिलाओं को ये आभास हो जाता है की कोई उन्हें पीछे से घूर रहा है,तो यह क्षमता छठवीं इन्द्रिय के होने की सूचना है।आंतरिक संकेत को सरल रूप में पूर्वाभास भी कहा जा सकता है।

ऐसा कई बार देखा गया है की कई लोगों ने अंतिम समय में अपनी यात्रा को स्थगित कर दिया और चमत्कारिक रूप से किसी दुर्घटना का शिकार होने से बच गए।जो लोग अपनी इस आत्मा की आवाज़ को नहीं सुन पाते वो पछताते हैं।व्यक्ति को पूर्वाभास की क्षमता को विकसित करना चाहिए।यदि आप इस अहसास पर गहराई से ध्यान देंगे तो पता लगेगा कि पहले की अपेक्षा अच्छे से पूर्वाभास होने लगे हैं।शुरुआत में कोई फ़ोन बजे तो किसका है,या दरवाज़े पर घंटी बजे तो कौन आया है,इसका अनुमान लगाकर क्षमता बढ़ाने की शुरुआत कर सकते हैं।जैसे जैसे अभ्यास गहराएगा आपकी छठवीं इन्द्रिय जागृत होने लगेगी।मन की स्थिरता और उसकी शक्ति ही छठवीं इन्द्रिय के विकास में सहायक सिद्ध होती है।

विकसित सभ्यता के इस दौर में ऐसा लगता है कि मनुष्य प्रत्येक प्रकार की विपदाओं से निपटने में सक्षम है,जबकि ऐसा नहीं है।पहले मनुष्य प्रकृति के घनिष्ठ सम्पर्क में रहता था,तब उसे शायद आने वाली विपदाओं का पूर्वाभास हो जाता था।पशु पक्षियों में आज भी इस तरह की क्षमता देखी जाती है।भूकम्प से पहले पशु पक्षी भागने लगते हैं,कुत्ते बिल्ली रोने लगते हैं,सांप और चूहे बिल से बाहर आ जाते हैं।कुछ लोगों को अपनी मृत्यु से पहले पूर्वाभास हो जाता है ।छठवीं इन्द्रिय की क्षमताओं के विकास की सम्भावनाएँ अनंत हैं।

*भिलाई नगर ,दुर्ग 

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