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चेन और चैन
June 16, 2020 • विनय मोहन 'खारवन' • कहानी/लघुकथा
*विनय मोहन 'खारवन'
वह डेली पैसेंजर था। हर रोज पास के शहर में काम पर जाता था। शाम को वापस आते वक्त सारे साथी इकट्ठे ट्रेन से आते ,खूब मस्ती मारते, गाना बजाना,ताश खेलना होता। फिर शहर के बाहर ही फाटक पर ट्रेन की चेन खींचकर ट्रेन रुकवा देते घर फाटक के पास ही था। कितनी मस्ती थी।
उस दिन उसे दूर शहर जाना पड़ा। उसकी मां की हालत सीरियस थी। ट्रेन के उस  डिब्बे में शायद डेली पैसेंजर थे। मस्ती में थे। किसी ने चेन खींचकर गाड़ी रुकवा दी।
गाड़ी पहले ही लेट थी और लेट हो गई थी। उसे गुस्सा आ रहा था ,उन चेन खींचने वालों पर। शहर पहुंचते-पहुंचते लेट हो चुका था। उसकी मां उसे याद करते-करते कुछ देर पहले ही मर चुकी थी।
उसे समझ आ गया था कि ट्रेन की चेन से कितनों का चैन जुड़ा हुआ है।
*सेक्टर 18, जगाधरी, हरियाणा
 

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