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चीन की चालाकी
May 25, 2020 • रश्मि वत्स • कविता

*रश्मि वत्स

चीन  की  है चालाकी  सारी,
पड़ी सारी दुनिया पर भारी ।
चंद  फायदे  के लिएे अपने ,
की सारी  दुनिया से गद्दारी ।

नापाक गलत  इरादों  उसके,
सबको  घाव   दिऐ  जिसने ।
कहर  बरसाया सारे विश्व में ,
खुद का दिया परिचय उसने।

कूट  नीती  की  यह  थी चाल,
और लेकर महामारी की ढाल।
मासूम  इंसानों  की बलि चढ़ा ,
उसे नही हुआ है कोई मलाल ।

संकट  पैदा  कर सब देशों में ,
यह  बना बैठा भोला है घर में ।
करोना की महामारी को देकर,
सोच रहा कर लूँ सब  वश में ।

आज  विश्व सारा पस्त  हुए हैं,
इस  महामारी से त्रस्त  हुए हैं।
कोई अब  उपाय नहीं सूझे है ,
हाल  हुए सबके  ही ध्वस्त हैं ।

बैठाया है सबको घर के भीतर,
रोज़गार  व सब  कुछ  बंदकर।
चीन ने मक्कारी से किया काम,
अर्थवयवस्था खतरे में डालकर।

खतरे में देश की अर्थवयवस्था है,
गर सुदृढ़ करना फिर भारत को ।
बहिष्कार कर उसके उत्पादों का,
उसे घुटनों के बल पर चलाना है ।

विदेशी उत्पादों का करे बहिष्कार,
स्वदेशी  उत्पादों  को  अपनाकर ।
देश को विकसित बनाएँगें हमसब,
इस संकंल्प से हम सब मिलकर ।

*रश्मि वत्स, मेरठ(उत्तर प्रदेश)

 

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