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चंदा के चक्कर में
November 24, 2019 • *राम नारायण साहू 'राज' • कविता

*राम नारायण साहू 'राज'*

एक दिन हमने सब मिलकर ,गणेश  बिठाने का विचार बनाये |

दूसरे दिन ही झाकी को , दुल्हन कि तरह  सवारे  तरह सजाये ||

एक सज्जन ने आकर बोले , क्यों भाई यहाँ क्या हो रहा है |

मेरे अंदाज से ,फिर कोई नया सूरज उदय हो रहा है ||

मैंने कहा -भाई साहब ,हम बुजर्गो  के परम्परा को आगे बढ़ा रहे है |

यकीन करो हम चालीस वर्षो से झाकी में गणेश जी को बिठा रहे है ||

सज्जन गुस्से में बोले ,अभी तो आपकी उम्र बीस साल है |

मैंने प्यार से कहा - भाई साहब ये आपका कैसा सवाल है ||

आपको यकीन दिलाने के लिए ,पुराना फ़ाइल दिखा रहा हूँ |

पच्चीस साल तक पिताजी बिठाये ,पंद्रह सालो से मै बिठा रहा हूँ ||

सज्जन जाने लगे  तो मै कहा ,गणेश जी का प्रसाद शाम को ले जाना |

आरती में आते वक्त ,दो चार पैसे चढाने के लिए ले आना ||

मुड़ते हुए सज्जन बोले - इस बात को रखुगा मै याद |

चंदा तुम कल ले लेना , तब देना मुझे प्रसाद ||

मैने कहा - अभी घर जाइये , कल झाकी में आइये |

कल झाकी में आने के लिए ,देर मत लगाइये ||

तीसरे दिन बड़े  धूमधाम से ,गणेश जी को बिठाया गया |

आरती के पहले ,चालीस किलो का लड्डू हाथो में रखाया गया ||

सवेरे किसी ने मेरा दरवाजा पिटते कहा , क्यों राज भाई जग गए |

जो सज्जन को आज आना था , वो चंदा के चक्कर में बस्ती छोड़कर भाग गए || 

 

*राम नारायण साहू " राज "

सप्तमूर्ति मंदिर के पास, मुर्राभट्टी , गांधी नगर , गुढ़ियारी , रायपुर ( छत्तीसगढ़ )  - 492011

मोबाइल नंबर -+91 – 90399-02944 

 E-mail - rnsahu1984@gmail.com

 
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