ALL कविता लेख गीत/गजल समाचार कहानी/लघुकथा समीक्षा/पुस्तक चर्चा दोहा/छंद/हायकु व्यंग्य विडियो
चलें..तो ही पहचान होती है
July 24, 2020 • ✍️नमिता गुप्ता 'मनसी' • कविता

✍️नमिता गुप्ता 'मनसी'
सुनों..
राहें अंजान ही होती हैं,
चलें तो ही पहचान होती है !!
पथ दूभर हो,
या कि दुश्वारियों भरा
मन हो दृढ़,
तो बाधाएं मेहमान होती हैं !!
चले हम..चलना ही था,
कहो डर कैसा
ये मुट्ठी भर आशाएं भी
भगवान् होती हैं !!
सुनों, भावों की तहरीरों को
मंजिल बना लिया
बिन तुम्हारे, कहां
वीथिका आसान होती है !!
हां, राहें अंजान ही होती हैं,
चलें तो ही पहचान होती है !!
*मेरठ
 

अपने विचार/रचना आप भी हमें मेल कर सकते है- shabdpravah.ujjain@gmail.com पर।

साहित्य, कला, संस्कृति और समाज से जुड़ी लेख/रचनाएँ/समाचार अब नये वेब पोर्टल  शाश्वत सृजन पर देखेhttp://shashwatsrijan.com

यूटूयुब चैनल देखें और सब्सक्राइब करे- https://www.youtube.com/channel/UCpRyX9VM7WEY39QytlBjZiw