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भगवान बचाए रखना
May 22, 2020 • आशीष तिवारी निर्मल • कविता

*आशीष तिवारी निर्मल
 
भटक चुका है कितना बचपन,भगवान बचाए रखना, 
हाथों में है मोबाइल,सिगरेट,गन भगवान बचाएl
 
रोती हैं बेबस कितनी सीते और द्रोपती अब भी, 
घूम रहे दुर्योधन रावण,दु:शासन,भगवान बचाए रखनाI
 
गलियों में निर्वस्त्र घुमाया इक अबला को मिलकर सबने , 
घोषित कर के उसको डायन,भगवान बचाए रखनाI
 
सड़कों से संसद तक जा पहुंचे जेबकतरे जितने थे, 
जेलों से भी जीत रहे हैं इलेक्शन,भगवान बचाए रखनाI
 
तबाही के मुहाने पर है खड़ी युवा पीढ़ी अब तो निर्मल, 
ले रहे दवाई देख-देख विज्ञापन,भगवान बचाए रखनाI
 
*आशीष तिवारी निर्मल,रीवा मध्यप्रदेश
 
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