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बेटियां
July 1, 2020 • उर्मिला शर्मा • कविता
*उर्मिला शर्मा
बाबा ! सुना है
बिटिया के जन्म से ही
मां बापू सँजोते हैं उसके ब्याह का सपना
ब्याह कर सुखी ही तो था देखना
मैंने वही तो किया था
चुन लिया था जीवनसाथी
जो एक दूसरे के साथ थे निहाल
ये बात गई चुभ और कट गई मूंछ
बेटी के सुख से ज्यादा परवाह थी
उन्हें जमाने के तंज की
बरसों इंतजार कर चिकनी- चुपड़ी बातों से
छल से बुलाया घर
और मिटाकर बेटी के सुख का स्वर्ग
भेज दिया जमाई के संग मुझे स्वर्ग
वो भी अजन्मे नवासे के संग
चलो मिट गई तुम्हारी हृदय की चुभन
और ऊंची हो गयी मूंछ
बेटियां तो होती हैं फसलें
बोया, पनपाया व मनमर्जी काट लिया !!
 
*हज़ारीबाग झारखंड
 

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