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बी पॉज़िटिव यार
July 15, 2020 • ✍️विनय मोहन 'खारवन' • व्यंग्य
✍️विनय मोहन 'खारवन'
कुछ महीनों पहले सभी एक दूसरे को बी पॉजिटिव कह कर हिम्मत बढ़ाते थे। सकारात्मक सोच के लिए बी पॉजिटिव शब्द रामबाण का काम करता था।पर पिछले कुछ दिनों में 'बी पॉजिटिव' शब्द ने जो अपनी इज्जत खोई, वो जल्द वापिस होती नजर नही आती।कोरोना वायरस क्या आया , लोगो  को कुदरत जबरदस्ती पॉजिटिव करने पर तुली है। लोग हैं कि भगवान से हर समय दुआ मांग रहे है कि हे प्रभु मुझे तो क्या पड़ोसी को भी नेगेटिव रखो।बी पॉजिटिव कहने वाले शुभचिंतक सबसे बड़े दुश्मन नज़र आने लगे हैं।घर पर भी माँ, बाप बच्चों को कहते नज़र आते हैं, बी पॉजिटिव बेटा , लेकिन बी नेगेटिव आल्सो।अब एक ही बन्दा एक टाइम में  नेगेटिव पोसिटिव दोनों कैसे रह सकता है।चीन तेरा सत्यानाश हो, जो हमारी अच्छी भली खाती पीती जिंदगी को बाजारों के टिक्की गोलगप्पे खाने से भी बेज़ार कर दिया।आखिर क्या बिगाड़ा था तेरा ए चीन इन औरतों ने, जो मुंह पर मास्क लगवा कर इनकी लिपस्टिक तक छीन ली।इन औरतों की बददुआ लगेगी तुम्हें चीनियों।हो सकता है इनके शाप से तुम्हारी छोटी छोटी आंखे बिल्कुल बन्द ही न हो जाएं। लेकिन हो सकता है छोटे छोटे बच्चों की दुआयें तुम्हें बचा लें।क्योंकि उनकी स्कूलों की छुट्टियां जो हो गयी। कई बच्चे तो बिना पेपर दिए ही पास भी हो गए।ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर मोबाइल हर समय चला सकते हैं वो भी हर समय मोबाइल को ले कर डांटने वाले माता पिता के सामने। अब तो अखबार की हेडलाइन में पॉजिटिव की सँख्या बढ़ने की खबर अंदर नेगेटिविटी ला देती है।खैर क्या घबराना हम तो हमेशा से पॉजिटिव ही रहे हैं और पॉजिटिव ही रहेंगे।हमें चीन तो क्या दुनिया की कोई भी ताक़त अंदर से नेगेटिव नही बना सकती। औरतें चिंता न करें , हो सकता है मास्क पारदर्शी आ जाये और लिपस्टिक का रंग फिर से ज़िन्दगी में शामिल हो जाये।इसलिए बी पॉजिटिव।
*जगाधरी, हरियाणा

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