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बड़ी नहीं , अच्छी शिक्षिका बनना
September 4, 2020 • ✍️दिलीप भाटिया • कहानी/लघुकथा
संध्या बेटी ,
स्नेह। सरकारी स्कूल में शिक्षिका की नियुक्ति पर बधाई। मेहनत का फल मीठा होता है। तुमने मेरे मार्गदर्शन एवम् मेरी पुस्तकों समय तथा कैरियर को श्रेय दिया। पर बेटी मेरी भूमिका मात्र राह दिखाने भर की थी। सोशल साइट्स से तुम्हारे दो वर्षों के उपवास के साथ आत्मनिर्भर बन कर पढ़ाई करने एवम् लिखित नोट्स बनाने से ही तुमने प्रथम बार में ही सफलता प्राप्त कर अन्य परीक्षार्थियों को एक अनुकरणीय संदेश दिया है। यह भी एक सुखद संयोग है कि तुम पांच सितंबर शिक्षक दिवस पर अपनी ड्यूटी ज्वाइन कर रही हो। संध्या बेटी , तुम बड़ी नहीं लेकिन अच्छी शिक्षिका बनने का प्रयास करना। भौतिक विज्ञान को इस प्रकार पढ़ाना कि तुम्हारी कक्षा की छात्राओं को अतिरिक्त ट्यूशन कोचिंग की आवश्यकता नहीं हो। एक अच्छी शिक्षिका की यही कसौटी है। अगर मुझे किसी मित्र के घर भोजन करके आने के पश्चात अपने घर में भी खाना खाना पड़े तो निश्चय ही उस मित्र द्वारा खिलाए भोजन की गुणवत्ता पर एक प्रश्नचिन्ह लगेगा ही। इसी प्रकार स्कूल में पढ़ने के बाद भी विद्यार्थियों को उसी विषय के लिए ट्यूशन जाना पड़े तो फिर स्कूल के शिक्षक शिक्षिकाओं के पढ़ाने के तरीके पर उंगली उठाने का अधिकार अभिभावकों को रहेगा ही। स्कूल में प्रार्थना सभा समाप्त होने के बाद तुम स्कूल पहुंच रही हो तो फिर तुम्हें विद्यार्थियों को समय प्रबंधन पर उपदेश देने का अधिकार नहीं होगा। अगर तुम स्वयं किसी पार्टी में फास्ट फूड खा रही हो तो फिर तुम किस मुंह से उन्हें फास्ट फूड खाने के नुक़सान पर लेक्चर दोगी। स्कूल में सौंदर्य प्रतियोगिता नहीं होती है इसलिए स्कूल में तुम्हारा पहनावा शालीन होना चाहिए। बच्चे वह नहीं करते है जो हम कहते हैं। लेकिन बच्चे वह अवश्य करते हैं जो हम करते हैं। यह नियम स्कूल के साथ परिवार में भी लागू होता है। अपने पतिदेव को भी कहना कि वे भी अपने कॉलेज में गुटका तम्बाकू ज़र्दा सिगरेट का सेवन नहीं करें। मेरी हिदायतों का बुरा मत मानना। समाज में टीचर एवं डॉक्टर को सम्मान मिलता है पर हमें सतर्क सजग सावधान रहना चाहिए अपने आचरण में। मुझे विश्वास है कि तुम एवम् दामाद जी मेरी शिक्षाओं की लाज रखोगे। संपर्क बनाए रखना। पांच सितंबर की शाम को इस खुशी में मेरे घर पर ही आंटी के हाथ का भोजन स्वीकार करिएगा। दामाद जी को भी अलग से फोन कर निमंत्रित करूंगा। तुम्हारी आंटी तुम्हें साड़ी एवम् दामाद जी को नारियल देकर विदा करेंगी ही। एक बार पुनः एक अच्छी शिक्षिका बनने के लिए दिलीप अंकल का दिल से आशीर्वाद बधाई शुभकामना प्यार स्नेह। शेष मिलने पर 
दिलीप अंकल

*रावतभाटा राजस्थान

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