ALL कविता लेख गीत/गजल समाचार कहानी/लघुकथा समीक्षा/पुस्तक चर्चा दोहा/छंद/हायकु व्यंग्य विडियो
बारिश
June 27, 2020 • ममता सिंह • कविता
*ममता सिंह
 
मौसम ने अब रुत है बदली
धूप भी हो गई धुँधली-धुँधली
    
सूरज भी हो गया है मद्धम
चाँद छुपा बादल में हरदम
     
मौसम की हो छटा निराली
बारिश होती जब-जब रिमझिम
      
चिड़ियों को भी देखो, 
अब तो खुशी से गाती फिरती है
     
कभी यहाँ, कभी वहाँ है डोले
मन भर ये विचरती हैं
      
किसानों के चेहरों पर भी,
छाई अब तो खुशहाली है
      
नज़र जहाँ तक जाती है
देखो फैली हरियाली है
       
ऐसा ही हरा रंग छाए 
धरती के हर कोने में
      
जो भर दे खुशहाली 
हर प्राणी के जीवन में।।
 
*24 परगना(प.बंगाल)
 

अपने विचार/रचना आप भी हमें मेल कर सकते है- shabdpravah.ujjain@gmail.com पर।

साहित्य, कला, संस्कृति और समाज से जुड़ी लेख/रचनाएँ/समाचार अब नये वेब पोर्टल  शाश्वत सृजन पर देखेhttp://shashwatsrijan.com

यूटूयुब चैनल देखें और सब्सक्राइब करे- https://www.youtube.com/channel/UCpRyX9VM7WEY39QytlBjZiw