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बाहुबली का आदमी
August 21, 2020 • ✍️ प्रवीणराय शाह • कहानी/लघुकथा

✍️ प्रवीणराय शाह

देखते देखते ही  वो मेरे सामने बड़ा हो गया। बांका सजीला नौजवान बेकारी से जूझ रहा था। अचानक ही उसे पुलिस की नौकरी मिल गई। पोस्ट अस्थाई कांस्टेबल की थी। मैंने सोचा वह मेरी सहायता करेगा। मैंने कहा भैया एक गुंडा हर रोज आनेजाने वाली लड़कियों को छेड़ता है। ये ले 100 का नोट और इसे हवालात का रास्ता दिखाओ।

उसने 100 रु का नोट जेब में सरकाते हुए कहा कर दूंगा अंदर, मगर हालात जस के तस रहे। मैंने कहा भैया काम नही हुआ उसने कहा दादा इससे पंगा लेना अपने आपको मौत के मुँह मैं धकेलना है। यह बाहुबली का आदमी है। इसके तार दूर दूर तक जुड़े हुए है।

*व्यारा,जिला - तापी (गुजरात)
 

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