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बादल
June 17, 2020 • भावना गौड़ • कविता


*भावना गौड़
जीवन में नन्ही-नन्ही खुशियों का आना 
बादल बनकर बरसात की बूदों से मिट्टी का महकना
मन के भावों का यूं एक नया जन्म लेना
मन में शब्दों का प्रेम अंकुरण में पखो जाना       
मेरे मन की व्याकुलता बादलों को देखकर होना
प्यार जज्बात का स्वयं अपने मन से कहना
प्रेम का सागर है ये यही बादल
शब्दों की कहानी एक बेटी की जुबानी
बातें कहे अपने मन की कहानी   
बरसात में खुशियों का बादल की तरह आना है
ख़ुशी प्यार बनकर जीवन में फूलों की तरह महकना
वो एक पल मुझे महका जाना
नन्हीं बेटी का जन्म होना मिट्टी की खुशबू है
सजोकर रखों उस खुशबू को 
अपने आँचल में बरसात की छोटी बूंद की तरह होना
अपना जीवन जीना एक सुखद अनुभव पाना
यही अपना बादल बनकर अपने जीवन का महकना है.

*ग्रेटर नोएडा(उत्तर प्रदेश)

 

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