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औरों से पहले चाटुकारों और विभीषणों से निपटना जरूरी
June 25, 2020 • सुशील कुमार 'नवीन' • व्यंग्य
*सुशील कुमार 'नवीन'
दृश्य एक: नमस्कार! आप देख रहे हैं देश का नम्बर वन चैनल लपालप इंडिया और मैं हूं आपका सत्यवादी बकलोल। इस समय हाजिर हूं राष्ट्र की अस्मिता और सम्मान के सवाल को लेकर। क्या भारत चीन को करारा जवाब देगा। क्या देश को मिलेगा 20 जवानों की शहादत का बदला। क्या देश की 121 करोड़ जनता को जवाब देंगे प्रधानसेवक……..।
दृश्य दो: नमस्कार! मैं भारत कुमार। और आप देख रहे हैं देश का नम्बर वन विशुद्ध चैनल। फिलहाल समय है करन्ट टाइम का। देश की जनता दोराहे की स्थिति पर है। कोरोना पर सरकार की विफलता से आज हर जनमानस भयग्रस्त और व्याकुल है। दूसरी तरफ देश की विफल हुई विदेश नीति ने चिंता और बढ़ा दी है। भारत युद्ध के मुहाने पर खड़ा है और देश के मुखिया को जरा भी चिंता नहीं है। दुश्मन की सेना भारतीय सीमा में 5 किलोमीटर तक घुस आई है।
चौका दिया ना। व्यंग्यकार स्तम्भकार और न जाने क्या-क्या कार। आज माइक पकड़कर लाइव रिपोर्टर कैसे बन गए। ये कौन सा नया शौक पाल लिया। फुर्सत में बैठा एक न्यूज चैनल देख रहा था। कुछ नया देखने की चाह में जैसे ही चैनल बदला। आवाज सुनाई पड़ी। तीन तरफ़ से घेराबंदी कर ली गई है। जमीन से समंद्र तक ऐसे घिरेगा ड्रेगन।एलएसी से लपालप की एक्चुएल रिपोर्टिंग। जमीन पर सोफोर्स और गगन में ताकत दिखाएंगे झकोई। बॉर्डर से हमारी डराने वाली रिपोर्ट।  मेन फाइटर प्लेन जेड-1और जेड-2 आकाश में कुलांचे मार मार दुश्मन को भय बैठाने में जुट गए है। ड्रेगन की हर चाल से निपटेगा भारत। चैनल बदला तो यहां मामला विपरीत देखा। यहां दूसरे देश की ताकत का परिचय दिया जा रहा था। कौन-कौन सी मिसाइल है। लड़ाकू विमान किस स्तर के है। वायुसेना, नौसेना की क्या तैयारी है। साथ ही भारतीय ताकत के साथ उसका विश्लेषण भी किया जा रहा था। दोनों ही तरह की लाइव रिपोर्ट को देखकर मन मे विचार उमड़ने लगे कि ये भारत की तैयारी दिखा रहे हैं या दुश्मन को पूरी जानकारी देकर उसे और ताकतवर बनने का मौका दे रहे हैं। समय हौसला देने का है और ये देश की जनता को और डरा रहे हैं। एक तरफ चाटुकारिता और दूसरी तरफ अपनी ही कमियों को उजागर किया जा रहा था। दोनों का ही तरीका देशहित से विपरीत दिखा। राष्ट्रीय आपदा का समय न चाटुकारिता के लिए उपयुक्त है और न ही अपनी ही कमी को उजागर करने का। रामायण में विभीषण और महाभारत में चाणूर ये दो पात्र इनके लिए सर्वथा प्रांसगिक है। राम त्रिलोकी था। उसने राम के रूप में जन्म ही रावण को मारने के लिए लिया था। क्या उसे यह नहीं पता था कि रावण की नाभि में अमृतकोष है।जानकर तब तक अनजान बने रहे जब तक विभीषण ने इस बारे में जानकारी दी। उसी समय रावण ने उसे कुलघाती और न जाने क्या-क्या उपमाएं दीं।इसी के बाद 'घर का भेदी लंका ढाए' की कहावत मशहूर हो गई। अब दूसरा एंगल देखिए। कंस को आकाशवाणी से पता चल गया था कि उसकी बहन देवकी से उत्पन्न पुत्र उसका संहारक बनेगा। वह भयभीत भी था। उसे सबसे ज्यादा हौसला और हिम्मत उसका मुख्य सेवक और सभासद चाणूर ही देता था। कंस को बार बार वो ही विष्णु से टक्कर लेने और न डरने की कहता था। विभीषण ने तो रावण को सही दिशा में लाने का पूरा प्रयास किया था। जब उसे धक्के मारकर निकाला गया तभी वह राम की शरण में गया। चाणूर चाहता तो कंस को सही राह पर ला सकता था। पर उसने हर बार कंस को उकसाया। परिणाम दुनिया जानती है।
कोई भी युद्ध हाई लेवल रणनीति और कूटनीति के बिना नहीं जीता जा सकता है। रणनीति सदा ये कहती है कि दुश्मन को इस प्रकार घेरा जाए कि वो सम्भल ही नहीं पाए। कूटनीति इससे अलग है। उसके अनुसार अपने आपको दिखाओ कुछ और मौके पर करो कुछ। इतिहास पढ़ते आये हैं। बड़े-बड़े साम्राज्यों के पतन में ये दोनों ही प्रमुख रहे हैं। भारत-चीन, भारत-नेपाल सीमा विवाद इन दिनों सुर्खियों में हैं। स्वभाविक है कि इस कंडीशन में देश को हर तरह के हालातों से लड़ने के लिए तैयार रहना है। ऐसे में किसी भी तरह देश की कमियों को या शक्तियों को उजागर करना नियमों से परे हैं। ऐसे में औरों से तो बाद में लड़ें पहले इन चाटुकारों और विभीषणों का इलाज हो। 
*हिसार
 

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