ALL लॉकडाउन से सीख कविता लेख गीत/गजल समाचार कहानी/लघुकथा समीक्षा/पुस्तक चर्चा दोहा/छंद/हायकु व्यंग्य विडियो
अनुभूतियों के गजरे
October 29, 2019 • शिवानन्द सिंह सहयोगी • गीत/गजल
सबदों की धूप ओढ़े,
मन के सहन में उतरे,
कुछ अक्षरों के साये.
*
वर्णों के पैदलों में,
हैं दर्द के मृत्युंजय,
भावों के भव्य बंधन,
स्वरग्राम के धनंजय,
लय घुँघरुओं को बाँधे,
वाणी के मंजु पाये.
*
नम बादलों के आँसू,
अँखियों की भैरवी हैं,
बिजली की धड़कनों की,
पीरों की कैरवी हैं,
ध्वनि-वाटिका में उड़-उड़,
भँवरा ठुमरियाँ गाये.
*
सुधियों के मधुवनों के,
प्रतीकत्वों के प्रबंधन,
कथनों के वाक्य अभिनव,
शैली के हर समंजन,
अभिप्राय की झोंपड़ियों
की, छान को हैं छाये.
*
भाषा की आंतरिकता,
है व्यंजना की व्याख्या,
बिंबों के नव वसंतों,
संवेदना की आख्या,
अनुभूतियों के गजरे,
अवगाहनों के लाये.
*
*शिवानन्द सिंह 'सहयोगी',मेरठ
 

शब्द प्रवाह में प्रकाशित आलेख/रचना/समाचार पर आपकी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया का स्वागत है-

अपने विचार भेजने के लिए मेल करे- shabdpravah.ujjain@gmail.com

या whatsapp करे 09406649733