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आत्मविश्वास भरो मन में
September 10, 2020 • ✍️रविकान्त सनाढ्य • कविता

✍️रविकान्त सनाढ्य
आत्मविश्वास भरो  मन में, 
बाधाएँ टिक न पाएँगी !
 
बढ़ो आगे तुम  कर संकल्प, 
तुम्हारी जय हो जाएगी ।
 
वीरता हो मन में उत्साह, 
निराशाएँ छँट जाएँगी ।
 
गढ़ो तुम एक नया इतिहास,  
सफलता निश्चित आएगी ।
 
सुनो तुम हो प्रकाश के पुत्र, 
पीढ़ियाँ भी तर जाएँगी ।
 
उठो तुम दृढ़प्रतिज्ञ हो बंधु 
 लीक तुमसे बन जाएगी ।
 
चलो,तुम करो शंख का नाद, 
राह सबको मिल जाएगी ।
 
हो अमर सांस्कृतिक नाद 
व्यथाएँ सब मिट जाएँगी ।।
 
*भीलवाड़ा
 

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