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आसमाँ से नज़ारा लुटाता रहा
November 20, 2019 • नवीन माथुर पंचोली • गीत/गजल

*नवीन माथुर पंचोली*
 
आसमाँ से  नज़ारा लुटाता रहा।
रात भर वो सितारा लुभाता रहा।
 
कुछ सलीक़े उसी से चलो सीख लें,
वास्ता जो  सभी  से निभाता रहा।
 
मुस्कुराहट हमें भी वहाँ आ गई,
ये ज़माना  जहाँ मुस्कुराता रहा।
 
चाँद सूरज की तरहाँ है उसका सफ़र,
जो  उजालों का  दरिया बहाता रहा।
 
जानता है  रिवायत , शराफ़त सभी,
वो  झुकाकर भी नज़रें मिलाता रहा।
 
*नवीन माथुर पंचोली,अमझेरा धार मप्र,मो.9893119724
 

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