ALL कविता लेख गीत/गजल समाचार कहानी/लघुकथा समीक्षा/पुस्तक चर्चा दोहा/छंद/हायकु व्यंग्य विडियो
आई दीपावली आई
October 25, 2019 • admin
*रश्मि एम मोयदे*
अरे दीवाली आने वाली है। अरे हां दीवाली तो आने वाली है।  दीवाली आने वाली है सोचकर ही दिमाग में एक रूप रेखा तैयार होने लगती है। क्या क्या करना है, घर की सफाई से लेकर  साज सज्जा, मावा ओटाना, गुझिया, मिठाई, नमकीन आदि। बच्चों की अलग अलग फरमाइशें सबकी पसंद की चीजें बनाना है।यह सभी सोच ही रही थी, इतने में मोबाइल बज उठा, देखा तो बहूं का फोन था।
क्या कर रहे हो मम्मी जी।
बस दीवाली आ रही है, उसी के बारे में सोच रही हूं।
अरे अभी तो बहुत समय है और मैं आ  रही हूं  ना फिर आप क्यो चिंता कर रहे हो।
वैसे  आपने  क्या क्या तैयारी कर ली है।  
अभी कहां, अभी तो सोच रही हूं कहां से शुरूआत करु। तुम लोगों का रिजर्वेशन कन्फर्म हो गया ना।  
जी।
लीजिए रिंकी से बात कीजिए।
हां बिट्टू कैसे हो। आपके लिए क्या क्या बनाकर रखू।
अअअ बताती हूं गुझिया, गुलाबजामुन, मोदक, और भैया के लिए रसगुल्ले, मठरी ओर केक मैं आकर आपके साथ बनाउंगी।
अरे वाह बहुत बढ़िया।
आपको तो सब काम आता है।
अच्छा दादी ये बताइए दीपावली में क्या क्या करते हैं।
आप जब आओगे ना तब बताउंगी। 
अच्छा ओके दादी।
ओके बेटा, मोबाइल रख मैं अपने काम में लग ग‌ई।
पता ही नहीं चला, समय कब पंख लगाकर उड़ गया, तैयारी करते करते ही दीपावली आ गई। समय से बच्चे भी आ गये। 
पलक झपकते ही पूरा दिन निकल गया, रात को सोते समय बच्चो ने हमें (दादा दादी) घेर लिया, न‌ई न‌ई कहानियों की फरमाइश शूरु हो गई।
रिंकी,  बोली दादी आपने कहां था ना आप दीपावली के बारे में बतायेगे। 
हां बेटा बिल्कुल बताउंगी।
दीपावली के पहले हम पूरे घर की सफाई करते हैं, क्योकि बारिश के बाद  सीलन के कारण घर बहुत गंदे हो जाते हैं, मच्छर मक्खीयों  का प्रकोप बड़ जाता है, इसलिए घर का सारा सामान व कपड़े, अनाज आदि की सफाई करते हैं तथा घर की अंदर, बाहर से पुताई, पैटींग करते हैं। घर को फिर से नये जैसा सुन्दर सजा देते हैं। आंगन में भी रोज न‌ई न‌ई रांगोली बनाकर सुन्दर सजा देते हैं।
छोटे बड़े सभी मेम्बर्स के लिए नये कपड़े खरीदते हैं, तरह तरह के मीठे, नमकीन व्यंजन बनाते हैं। 
दीपावली का त्योहार एकादशी से शुरू होकर भाईदूज तक चलता है। एकादशी के दूसरे दिन वजबारस होती है, इस दिन सभी महिलाएं गाय और बछड़े की पूजा करतें हैं, खाने में ज्वार की रोटी और चवले की सब्जी बनती है। तीसरे दिन धनतेरस जिसे छोटी दीवाली कहतें है, गणेश जी व लक्ष्मी जी की और हमारे पास जो भी पैसे, गहने होते हैं उसकी पूजा करते हैं।
 चौथे दिन रुप चौदस, इस दिन  ब्रह्ममूहर्त में स्नान करते हैं और हमेशा सुन्दर, रुपवान रहतें है।
पांचवे दिन रात के समय, मूहर्त के हिसाब से पूरा परिवार  दीपावली की पूजा में लक्ष्मी पूजा करते है, व्यापारी वर्ग अपने बहीखाते की पूजा करतें है और नया बहीखाता बनाते है,और घर में बने पकवान, मिठाइयों का भोग लगाते है। छठे दिन गौवर्धन पूजा करते है, सातवें दिन भाईदूज की पूजा, इसे दवात पूजा (पेन और स्याही दवात की पूजा ) भी कहते है।
इस दिन बहनें भाइयों को टीका लगाती है। 
जो हम दीपावली में पकवान बनाते हैं वो हम हमारे सभी मिलने जुलने वालों को खिलातें है। इससे हमारे आपसी प्रेम  और संबंध को बढ़ावा मिलता है।
अरे दादी पटाखे  भी तो फोड़ते हैं,  और फूलझड़ी भी तो जलाते हैं, लेकिन सब कहते हैं पटाखो से प्रदूषण फैलता है, पर्यावरण दूषित होता है। क्या ये सही है? 
क्या , हमें पटाखे नहीं फोड़ना चाहिए।
बेटे पटाखों से ज्यादा तो पर्यावरण  दूषित होने का कारण  हमारे यातायात के अंधाधुंध साधनों का उपयोग करना है।
आजकल घर में जितने मेम्बर है उनकी सभी की अलग अलग गाड़ियां हैं, कम दूरी के छोटे-छोटे काम के लिए भी गाड़ी का उपयोग करते हैं। 
पक्के मकान, सड़क बनाने के लिए पेड़ों को कांटना,   शापिंग माल, फेक्ट्रियां बनाने के लिए जंगलों को खत्म करना, नदियों के पानी को दूषित करना, प्रकृति के नियमों का उल्लघंन करना आदि कारणों से पर्यावरण दूषित होता है।
हम जो दीपावली में पटाखे फोड़ते हैं उससे तो वातावरण शुद्ध होता है, क्योकि बारिश के कारण  धूप की कमी से,   नमी के कारण जो हानिकारक जीव जंतु पैदा होते हैं, उन्हें नष्ट करने के लिए हम पटाखे फूलझड़ियों की मदद लेते हैं। घरों की सफाई तो हम आसानी से कर लेते हैं, लेकिन बाहरी वातावरण, वायुमंडल को साफ करना मुश्किल होता है, इसलिए हमारे पूर्वजों ने ये वैज्ञानिक तरीका ढूंढा है।
फिर तो हम खूब पटाखे फोड़ेगें।
हमें  तो इसी में मजा आता है। 
हां फोड़ो, लेकिन अकेले नहीं, बड़ों के साथ में।अच्छा   दादी, अब आप दीपावली का अर्थ क्या होता है, ये बताइए।
अच्छा सुनो, दीपावली मतलब दीप वाली, याने दीपमालाओं से सजी रात।
दीपावली में दीपक जलाने का खास महत्व होता है।
महिनों पहले कुम्हार और मजदूर लोग दीये़  बनाने का काम शुरू कर देते हैं,  मिट्टी खोदकर घर लाना फिर मिट्टी से कंकड़-पत्थर अलग करना, पानी डाल डालकर गीली करना, ठोक ठोककर चिकनी करना, फिर एक गोल चपटे, सपाट पत्थर के चक्र पर चिकनी  मिट्टी के बड़े गोले को रखकर उसे डंडे की मदद से गोल गोल घुमाकर हाथों से छोटे बड़े दीयों को बनातें है, धूप में सुखाते हैं और एक बड़ी सी भट्टी में रखकर आग में तपाते है। 
एक एक दीया कितनी मेहनत से बनता है और कितनी कठिनाईयों से गुजरता है लेकिन ये सब मिलकर अपनी अपनी छोटी छोटी ताकतों का उपयोग कर अपने आस-पास के अंधेरो को दूरकर एक पंक्ति में रहकर अमावस्या जैसी काली अंधेरी रात को रोशनी से जगमगा कर दीपावली की रात में बदल देते हैं।
बच्चों आप इन दीयों की रोशनी का मतलब समझते हो।
नहीं ।
 हमें नहीं मालूम, आप बता दीजिए।  
बच्चों जब आप लोग बड़ो के पैर छूते हो, तो बड़े लोग आशीर्वाद देते समय कहते हैं ना कि खूब उन्नति करों, कुल का नाम रोशन करों।
जब हर घर के बच्चे चाहे लड़का हो या लड़की अपनी अपनी सामर्थ के हिसाब से अपने आसपास की बूराईयो को दूर करने के लिए एकजुट होकर लाखो, करोड़ों की संख्या में   इकट्ठे होकर  बूराईयों  रुपी अंधकार को दूर कर, सच्चाई,  मेहनत, लगन से सुख समृद्धि  रुपी प्रकाश से पूरे जहां को जगमगा देगें तो पूरी दुनिया में सुख शांति  हो जायेगी।
दीपावली का ‌ सही मतलब यही होता है कि हर घर के  बच्चे एक दीये की तरह अपने संस्कारों से अपने आसपास की अंधकार रुपी  बूराईयो को दूर कर  अच्छाई रुपी रोशनी से देश के कोने-कोने को जगमगा दे।
जिस प्रकार भगवान श्रीराम ने  रावण को मार कर मानवता की रक्षा की थी और चौदह साल का वनवास पूरा कर अयोध्या लौटे थे, (उनके स्वागत में अयोध्यावासियों ने पूरे राज्य को दीपमालाओ से सजा दिया था और कहीं दिनो तक उत्सव मनाया था। उसे ही दीपावली का नाम दिया गया है ) और रामराज्य की स्थापना की थी।
हम भी  भगवान  श्रीराम के आदर्शों पर चलकर हमारे भारत देश को फिर से रामराज्य जैसा बना सकते हैं।
दादी अब मुझे दीपावली का मतलब समझ में आ गया है। स्कुल जाकर मैं अपनी टीचर को बताउंगी।
शाबाश बेटा।
अब बहुत रात हो गई है, सो जाओ।
शुभ दीपावली दादी।
शुभ दीपावली।
 
*रश्मि एम मोयदे उज्जैन

शब्द प्रवाह में प्रकाशित आलेख/रचना/समाचार पर आपकी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया का स्वागत है-

अपने विचार भेजने के लिए मेल करे- shabdpravah.ujjain@gmail.com

या whatsapp करे 09406649733