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 मई - जून  की  धूप
May 10, 2020 • अशोक 'आनन ' • गीत/गजल

*अशोक ' आनन ' 
देह - कुशन में 
पिन - सी चुभती -
मई - जून की धूप ।
 
सूरज
   धरा पर  उड़ेल रहा -
        आसमान  से  लावा ।
बूढ़ा बरगद 
    कर रहा -
         घनी छांव का दावा ।
मन - मछलियां 
गटक रहीं -
रेत - नेह का सूप ।
 
बिना निचोड़ ही 
    सूख गया -
         तर-  रूमाली मन ।
गर्म तवे - से 
    तप रहे -
         पथरीले घर के दामन ।
भील - कन्या - से 
अब सुखाने -
ताल , नदी और कूप ।
 
लू   की   धूनी   ताप   रहे 
    साधक पेड़ -
         दोपहरी            में ।
बदन , बर्फ - से पिघल रहे 
    सूरज की -
          कोर्ट - कचहरी में ।
सज - धजकर निकली
सुबह का अब -
बिगड़ गया रंग - रूप ।
 
*अशोक 'आनन' 
 मक्सी ,जिला - शाजापुर (म.प्र.)
 

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