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विश्ववाणी के साहित्य पर्व 16 के अन्तर्गत कथा पर्व
May 20, 2020 • पुनीता भारदवाज • समाचार

जबलपुर,  विश्ववाणी हिंदी संस्थान अभियान जबलपुर के तत्वावधान में दैनिक सारस्वत अनुष्ठानों की श्रृंखला में16 वां कथा पर्व  का आयोजन पलामू झारखण्ड के प्रो. आलोक रंजन की अध्यक्षता, पुनीता भारदवाज भीलवाड़ा के मुख्यातिथ्य  तथा अरुण श्रीवास्तव 'अर्णव' के विशेषातिथ्य  में संपन्न हुआ।  श्रीगणेश इंजी. उदयभानु तिवारी 'मधुकर' ने स्वरचित सरस्वती वंदना का सस्वर गायन कर किया।

संस्थान के संयोजक प्रसिद्द छंद शास्त्री-समीक्षक आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' ने विषय प्रवर्तन करते हुए कथा का जन्म माँ तथा अजन्मे संतान के मध्य वार्ता से बताते हुए महाभारत के अभिमन्यु प्रसंग का संदर्भ दिया तथा कहा  भारतीय समाज में चिरकाल से कही जाती रही शिशु कथाएँ, बाल कथाएँ, पर्व कथाएँ, बोध कथाएँ, दृष्टांत कथाएँ, नीति कथाएँ, लोक कथाएँ आज भी प्रासंगिक हैं। । भारत सरकार की हिंदी सलाहकार समिति की सदस्य वरिष्ठ उपन्यासकार डॉ. राजलक्ष्मी शिवहरे ने 'चिम्पी जी की दुल्हनिया' बाल कथा का पाठ कर स्वजाति प्रेम की सीख दी। 'अनमोल उपहार' बाल कथा का वाचन कर कविता राय दिल्ली ने आर्थिक असमानता की अदेखी कर समानतापरक व्यवहार की सीख दी।

सिरोही के ख्यात साहित्यकार छगनलाल गर्ग 'विज्ञ' ने राजस्थानी कथा के माध्यम से दरबारियों की मुँहदेखी और कपट को उद्घाटित किया। संतोष शुक्ल ग्वालियर ने बालकथा के माध्यम से परोपकार का महत्व प्रतिपादित किया। से. नई. जिला जज मीना भट्ट ने रूप चतुर्दशी पर कही जानेवाली पर्व कथा सुनाकर उनका लक्ष्य तन-मन तथा पर्यावरण की स्वच्छता बताया। पुनीता भारदवाज ने राजस्थान में लोक कथाओं के महत्व को उद्घाटित करता हुआ आलेख प्रस्तुत किया। डॉ. मुकुल तिवारी ने बाल कथाओं को माँ द्वारा शिशु में  संस्कार रोपण का माध्यम बताया। पानीपत से पधारी मंजरी शुक्ल ने बाल कथा के माध्यम से पौधरोपण और हरियाली बढ़ाने की प्रेरणा दी। 

रायपुर छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व कर रही रजनी शर्मा ने निश्छल बाल प्रेम और धार्मिक वैमनस्य की कार्मिक कथा "सारी कौड़ियां उसके हक में औंधी हूं " सुना कर वाहवाही पाई। दमोह से पधारी मनोरमा रतले ने कोरोना के संदर्भ में बालोचित सरस् प्रसंग युक्त कहा कही। इंजी. अरुण भटनागर ने नीति कथाओं का महत्व प्रतिपादित करते हुए उन्हें पाठ्यक्रम में सम्मिलित किये जाने की सलाह दी। झारखण्ड के प्रो. आलोक रंजन ने मेवाड़ के कीरत बारी और पन्ना धाय की ऐतिहासिक कीर्ति कथा सुनाकर बलिदान का महत्व प्रतिपादित की।

नल - दमयंती की नगरी दमोह से सम्मिलित हुई बबीता चौबे 'शक्ति' ने कलिकाल के प्रभाव को इंगित करती कथा सुनाई। मनोरमा जैन 'पाखी' भिंड ने माया-मोह की निस्सारता को उद्घाटित किया। छाया सक्सेना 'प्रभु' ने बाल कथाओं की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। मीनाक्षी शर्मा 'तारिका' ने बाल शिक्षा में बाल कथाओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए पाठ्यक्रम में अधिकाधिक सम्मिलित किये जाने पर बल दिया। इंजी. एच. एल. बड़गैया ने आपके आलेख में माँ हुए शिशु के बीच कथा को ज्ञान प्रदाय का माध्यम बताया। मिथिलेश बड़गैया ने शिक्षक और विद्यार्थी के मध्य आत्मीय संबंध स्थापित करने में पाठ्य सामग्री की और उन्मुख करने में कहानी को सहायक बताया। अध्यक्षीय संबोधन में पलामू प्रो  आलोक रंजन ने विश्ववाणी हिंदी साहित्य संस्थान अभियान द्वारा १६ दिन लगातार अंतरजाल समूह पर साहित्यिक अनुष्ठान किया जाना अभूतपूर्व उपलब्धि और गिनीज बुक में दर्ज किये जाने योग्य बताया। आभार प्रदर्शन श्रीमती विनीता श्रीवास्तव ने किया।

 

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