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ये हनीट्रैप क्या है प्रिये(व्यंग्य)
September 21, 2019 • admin

*डॉ हरीशकुमार सिंह*

पत्नी की उत्सुकता चरम पर थी और उनसे रहा नहीं जा रहा था  जबसे उन्होने ये समाचार पढ़ा कि कुछ अधिकारियों - राजनेताओं को कुछ मासूम युवतियों ने ' हनीट्रैप ' में फंसा लिया । उसने पूछा अच्छा ये बताओ ये 'हनीट्रैप' आखिर है क्या प्रिये। मैंने कहा ये सदियों से चली आ रही पावन परंपरा है जिसमें नवयौवनाओं को सामने रखकर , पुरुष अपना काम निकलवाते आये हैं। बस इस   विधा के नाम बदलते रहे हैं। पहले जब राजा महाराजा एक दूसरे से युद्ध करते थे तो विरोधी राजा की युद्ध गतिविधियों और शक्ति परखने और आक्रमण की चाल जानने के लिए साहसी ,राष्ट्रभक्त महिला गुप्तचरों को उनके राज्य भेजते थे जो सामने वाले के मंत्री या सेनापति या किसी प्रमुख को अपने मोहजाल में फंसा कर उनकी योजना जानकर अपने राजा को संदेश दे देतीं थीं। पकड़े जाने पर आत्महत्या जिसे , हाराकिरी कहते हैं कर लेती थीं। स्वर्ग में देवताओं के राजा इंद्र ने पुरातन में इसका उपयोग खूब किया क्योंकि युद्ध से तो कोई इंद्र से राज छीन नहीं पाता था तो जब किसी के तप से इंद्रासन डोलता था तो इंद्रदेव , ऐसी ही नवयौवनाओं जिन्हें अप्सराएं , रंभा , मेनका , उर्वर्शी, तिलोत्तमा आदि के नाम से जाना जाता था , इंद्र ,तप कर रहे , ऋषि - मुनियों की तपस्या भंग करने भेज देते थे और ये अप्सराएँ , जो अनुपम,अतिसुन्दर ,अनेक कलाओं में प्रवीण ,तेजस्विनी,और जादुई शक्ति से सम्पन्न होती थीं , अपने कार्य में सफल भी हो जातीं थी और इसलिए इंद्र का सिंहासन कभी कोई हिला नहीं पाया इन अप्सराओं की बदौलत।इंद्र के पास ऐसी ग्यारह अप्सराएँ थीं और इनकी प्रधान रंभा जी थीं |

 वर्तमान में भी एक देश की सेना की गतिविधियों की खुपिया जानकारी दूसरे देश की सेना को देने की जयचंदी परम्परा में कोई न कोई रोज पकड़ाता ही है और इसमें भी अबलाएं ही आगे रहतीं हैं जो अपने देश के लिए जासूसी कर , पुरुष अधिकारियों से राज जान लेतीं  हैं।प्रिये तुम भी तो मुझसे ऐसे ही प्रेम से बोलकर कि मुझे सच सच बता दोगे तो मैं कुछ नहीं कहूंगी, कहकर राज उगलवाती आई हो और फिर ....। ये भी एक तरह का ट्रैप ही है।अब आजकल बालाएं किसी के भरोसे नहीं हैं और खुद अकेले ही ऐसे जोखिम उठा कर आगे बढ़ रहीं हैं | वर्तमान में जिस हिसाब से बेरोजगारी और महिला सशक्तिकरण का जोर है नए नए तरीक़े रोजगार के सामने आ रहे हैं। जैसे अपने शहर का प्रमुख रोजगार , चैन स्नेचिंग है वैसे ही महानगरों की कमसिन बालाएं, भ्रष्ट , टुच्चे राजनेता - अधिकारियों की काली कमाई से कुछ हिस्सा अपने लिए निकलवाने में सफल हो जाती हैं उसे हनीट्रैप कहा जाता है। हनी का मतलब शहद होता है और ट्रेप का अर्थ समझ लो जाल होता है तो अपनी शहद की मानिंद मीठी मोहक अदाओं से भ्रष्ट अधिकारियों को अपने जाल में फंसाना और फिर उसकी मोबाइल फ़िल्म बनाकर सार्वजनिक रूप से ब्लाकबस्टर प्रदर्शित करने की धमकी देकर, ब्लेकमेल कर 'हनी का मनी मांगना' हनीट्रैप है। ये सब राजी खुशी चलता रहता है मगर अति हर चीज की बुरी मानी गई है और जब कोई  कमसिन बाला ,अबला बनकर ये सब करती है चलता रहता है मगर जब कोई , बाला , सबला होकर बला बनने की कोशिस करती है तो फिर ये राज , राज नहीं रहते, उजागर हो जाते हैं और हनीट्रैप के नाम से सामने आते हैं। बस ये समझ लो शॉर्ट में कि  'हनीट्रैप',  'मीटू' का उल्टा है |

*डॉ हरीशकुमार सिंह, उज्जैन