ALL कविता लेख गीत/गजल समाचार कहानी/लघुकथा समीक्षा/पुस्तक चर्चा दोहा/छंद/हायकु व्यंग्य विडियो
मैंने इस दिल को काँटो से सजा रखा हैं(कविता)
October 4, 2019 • admin
*पुखराज जैन पथिक*
 
मैंने इस दिल को काँटो से सजा रखा हैं
अपने दुश्मन को गलिचों पे सुला रखा हैं।
 
नजर न लगे किसी साकी की मय तुझको
इसलिए तुझको बोतल में छिपा रखा हैं।
 
तेरी बेवफाई भी मंजूर है मेरे यार मुझको
तेरे वादो को पलको में बिठा रखा हैं।
 
तेरे बिना जी लेंगे जमाने में हम तो
तेरी सूरत को ही दिल में बसा रखा हैं।
 
आस कहती हैं लौट कर आएगी तु फिर
दिल में उम्मीद का चिराग जला रखा हैं।

*पुखराज जैन पथिक भाटीसुडा नागदा मो. 9399038277

शब्द प्रवाह में प्रकाशित आलेख/रचना/समाचार पर आपकी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया का स्वागत है-

अपने विचार भेजने के लिए मेल करे- shabdpravah.ujjain@gmail.com

या whatsapp करे 09406649733