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मिट्टी की दीवारें (कविता)
October 4, 2019 • admin
*श्रीमती मीना गौड़*
 
मिट्टी की दीवारें , टूटी छ्त ये कहती है ।
हम हुए पुराने , बच्चों दुनियाँ अब तुम्हारी है ।।
 
अंबर को छुते घर हों ।
पर गूंज हँसी की बिखेरे रखना ।।
 
जगमग हो रोशनी से घर सारा ।
पर सुर्य की किरणों को समेटे रखना ।।
 
कभी चांदनी रात में  ।
याद बिते पलों की करते रहना ।
 
जब याद आए वो अपने ।
तो चाँद में उन्हें देखते रहना ।।
 
रखना याद , बचपन अपना ।
बच्चों को भी ख़ुशियां देते रहना ।।
 
भीगने देना बारिश में ।
एक नाव कगज़ की बना कर देना ।।
 
ग़र हो मिलना पड़ोसियों से कभी ।
तो रिश्तों की डोर बांधे रखना ।।
 
जब मिले फुर्सत कभी ।
तो पिटारा यादों का खोलते रहना ।।
 
यादों की इस मिठी हलचल से ।
परिवार को संस्कारों में बांधे रखना ।।
 
उम्र के हर दौर को ,खुशियों से भरते रहना ।
छु लेना अंबर को , पर जड़ों को अपनी मत भूलना ।।
 
मिट्टी की दीवारें , टूटी छ्त ये कहती है ।
हम हुए पुराने , बच्चों दुनियाँ अब तुम्हारी है ।।
 
*श्रीमती मीना गौड़ " मीनू मांणक ",इन्दौर ( मध्य प्रदेश) 

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