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बेवजह बहने दो (कविता)
October 7, 2019 • admin

*मीना अरोड़ा*

हर बार जरूरी नहीं

वजह का होना

कभी कभी 

अच्छा लगता है

मोतियों को बिना

धागों के संजोना

क्योंकि

धागे जब कभी

 उलझते हैं तो

सुलझते नहीं

बना गांठों के गट्ठर

न लगाओ कोई

गठबंधन

इन धागों को 

स्वछंद रहने दो

मैं तुम्हारे मन की

तुम मेरे मन की

एक दूजे को कहने दो

इस रिश्ते में

नाम का होना

जरूरी नहीं

नहीं है वजह कोई

 तो वजह को रहने दो

बेवजह बरसने दो

ताप को बूंदें सहने दो

मत बोलो कुछ भी

जुबां से

खामोशियों को 

सब कुछ कहने दो

आज बह रही है

पगली पवन

बेवजह बहने दो।।

*मीना अरोड़ा, उत्तराखंड

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