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न बैठना कभी हारकर(कविता)
September 12, 2019 • admin
-प्रशांत निर्मोही
न बैठना कभी हारकर 
सपनो को जिंदा मार कर
यह खुद से खुद की जंग है
जीत के सपने साकार कर
 
है कठिन जरा रास्ता
चुनौतियाँ स्वीकार कर
है अदम्य साहस भीतर अगर
बाधाएँ सारी पार कर
 
भीतर जो गूंजे शंखनाद
तू सिंह सी हुंकार भर
जीतना हर हाल है
खुद को यूँ तैयार कर
 
एक भय ही शत्रु है तेरा
खुद इसका संहार कर
बल,बुद्धि और ज्ञान से
प्रहार कर,प्रहार कर
 
न बैठना कभी हारकर 
सपनो को जिंदा मार कर
 
-प्रशांत निर्मोही