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नट सम्राट बालगंधर्व
July 16, 2020 • ✍️निशा झा • लेख
✍️निशा झा

दोस्तों बचपन, बालावस्था, नटखटपन, नौटंकी! इन सभी को "बालपन " या छोटी - सी एक उम्र आदि कहते हैं! और बालगंधर्व यांनी उस छोटी - सी उम्र में से एक बड़ा रोचक और ज्ञानवर्धक या कहाँ जाये तो कलाकार जो पुरे विश्व में एक मेव कार्य कर ख्याति प्राप्त कर उच्च स्तरीय मंच पर अपनी क्षमता प्रस्तुत कर अनोखा स्थान पर जा बैठे! अर्थात इन सब में किसी भी तरह की बातों का कोई अर्थ न होकर भी बहुत कुछ होता है! जो सहज मन से कहना मुश्किल हो ब. जीवन का पहला पड़ाव मात्र हो! जहाँ हमें मसत मौला होकर विचरण करे! चीजों को देखे, समझें, अनुभव करें! इनमें कुछ अच्छा होता है तो कुछ बहुत खुब सुरत ओर इन सभी के बाद उभरकर आता है! वह होता है कलाकार जो जीवन की संरचना कर खुद के व्यक्तित्व की अभिव्यक्ति करने की कोशिश कर बालगंधर्व चरित्र का नवनिर्माण करता! उन्होंने रंगमंच पर अपने अभिनय की शुरुआत सर्वप्रथम शकुंतला का चरित्र निभाकर की थी!,ऐसे है ! एन एस राजहंस, "बालगंधर्व"

इन सब में उभरते पद्मभूषण, संगीत, नाटक अकादमी पुरस्कार नारायण श्रीपाद राजहंस (बालगंधर्व ) वैसे किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है! आप पेशे से गायकी, नाटक, अभिनय व संगीत में नाम रोशन कर चुके हैं! आपका जन्म 26 जून 1888 महाराष्ट्र के सांगली जिले के नागठाने में हुआ था! व मृत्यु 15 जूलाई 1967 में आज आपकी पुण्यतिथि निर्मितियां से याद करते हुए!आप ने गायन व अभिनय जगत में सर्वश्रेष्ठ स्थान प्राप्त किया है! जो विस्मृतिय हैं! आपके नाटक में शुरूआत में मराठी - रंगभूमि पर अभिनय की छटा बिखेरी जो देखते नहीं बनती हैं! स्त्री का वैश धर कर जो अभिव्यक्ति कर बालगंधर्व जी ने बहुत बड़ी उपलब्धि प्राप्त की!

"थूमरी", अर्थ भारतीय संगीत का एक सामान्य शैली हैं! जो थूमरी हिन्दी क्रिया थूमका या ठुमका शब्द से बना हैं! जो डांस स्टेप्स की एक चाल से है यह नृत्य, नांटक में भाव को कहा जाता है! जो गीत - संगीत के माध्यम के साथ सांझा किया जाता हैं! जो कि बालगंधर्व रंगमंदिर में सहजता से अभिव्यक्त करते रहें! भारतीय संगीत में अपना योगदान देकर आप ने जो उपलब्धियां हासिल की वह स्मृति स्मरणीय है! बालगंधर्व के साथ गोहरबाईं की जोड़ी को बहुत सराहना की जाती रही हैं!

"बालगंधर्व",नारायण श्रीपाद राजहंस को 'बाल गन्धर्व' के नाम से अधिक जाना जाता है। यह नाम उन्हें भारत के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानियों बाल गंगाधर तिलक ने दिया था। बाल गन्धर्व मराठी रंगमंच पर महिला चरित्रों को निभाते थे, क्योंकि तत्कालीन समय में महिलाएँ रंगमंच पर किसी भी प्रकार की भूमिका नहीं निभाती थीं। पं. भास्करबुवा बखले के शिष्य व मासतर कृष्णरावां के गुरू थे! आगे चलकर प्रभात फिल्म कंपनी के लिए बालगंधर्व ने धर्मात्मा चित्रपट (फिल्म) संत एकनाथं की भूमिका भी निभाईं! बालगंधर्व अपनी भूमिका साकारून संगीत, नाटक व नाट्यसंगीत ये कला के माध्यम से मध्यम वर्गीय महाराष्ट्रीयन परिवार (कुटुंब) में लोकप्रिय होते गए! नाटककार, अण्णासाहेब किर्लोस्कर, गोविंद बल्लभ देवल और बंसत शांताराम देसाई पुनर्निर्मिती लिखी अनेक संगीत नांटक बालगंधर्व द्वारा किया गया! वृद्ध अवस्था व बिमारी के कारण मृत्यु हो गई! बालगंधर्व चरित्र व उनके की अनेक पुस्तकें हैं! संगीत, नाटक अकादमी व कलाक्षेत्रों में एक सर्वोच्च भारतीय सम्मान पुरस्कार प्राप्त हुये हैं! 

*जयपुर(राज)

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