ALL कविता लेख गीत/गजल समाचार कहानी/लघुकथा समीक्षा/पुस्तक चर्चा दोहा/छंद/हायकु व्यंग्य विडियो
तराश कर मत बनाओ प्रतिमाएं (कविता)
September 30, 2019 • admin

*अलका 'सोनी*
तराश कर मत बनाओ प्रतिमाएं
थोड़ी  अनगढ़  ही  रहने  दो।
 
ऊब  गयी  महलों में  रहकर,
अब ताप भी थोड़ा सहने दो।
 
अलंकार का यह बोझ उतारो
उन्मुक्त  गगन  में  उड़ने  दो।
 
नर   ही बने  रहे  तुम   सदा
मुझको भी  नारी रहने  दो।
 
रख  लो सारी पूजन सामग्री
अब  और न देवी  बनने दो।
 
दुर्गा,  लक्ष्मी , काली की ये
उपमायें  तुम बस रहने दो।
 
है   वाणी , मूक   नही  मैं,
प्रखर प्रवाह बन बहने दो।
 
इंद्रधनुषी  इस  जीवन  में
स्वयं  सप्त  रंग भरने दो।
 
*अलका 'सोनी',बर्नपुर, पश्चिम बंगाल

शब्द प्रवाह में प्रकाशित आलेख/रचना/समाचार पर आपकी महत्वपूर्ण प्रतिक्रिया का स्वागत है-

अपने विचार भेजने के लिए मेल करे- shabdpravah.ujjain@gmail.com

या whatsapp करे 09406649733