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जेठ की निर्जला नदी !
May 16, 2020 • अशोक 'आनन' • गीत/गजल
      
*अशोक 'आनन'
 
भील - कन्या - सी 
अब कांटा हुई -
जेठ की निर्जला नदी ।
 
         सड़क - गली 
         अपाहिज़ - सा लेटा -
         बूढ़ा    सन्नाटा ।
         पेड़ों   को 
         इस साल भी हुआ -
         छांव का घाटा ।
धूल - धुओं में 
अब मलीन हुई -
यह शुभ्रा सदी ।
 
           हवा भी थककर
           अब दुबक गई -
           पेड़ों  के  पीछे ।
           उमस पर लेटी है
           जेठ -  दुपहर -
           आंखों को मींचें ।
अंगारों - सी दहकती 
धूप की गठरी -
सिर पर लदी ।
 
*अशोक 'आनन',मक्सी,जिला - शाजापुर ( म.प्र.)
 

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