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गांधी बाबा पाछा आओ (निमाड़ी कविता)
October 1, 2019 • admin

 

*शिशिर उपाध्याय*

गांधी बाबा पाछा आओ ,,,,

गांधी बाबा पाछा आओ,

गांधी बाबा पाछा आओ

जन मानस का हिवड़ा न s म s

परेम को दियो जलाओ ,,,

 

थारा देस का भाई - भाई , 

वात -वात म s लड़ी रह्या ,

जात-पात अन धरम का नॉव सी

आपस म s ऊ भिड़ी रह्या,

"देस धरम" सी बड़ो नी कोई

आई न s तुम समझाओ ,,, गांधी बाबा पाछा आओ

 

चरड़ ,चरड़, चड़ चरखो बी तो

थारा देस सी रूठी गयो ,

सूत - कपास न s तकली वाळो 

रिश्तो - नातो  टुटी गयो ,

गुता -पात छे , देस तुम्हारो 

आई न s तुम सुलझाओ , गांधी बाबा पाछा आओ 

 

अवतारी था "गांधी बाबा"

भारत भाग्य विधाता था

रोज सांझ की प्राथना म s

रघुपति राघव गावता था,

"वैष्णव जन तो तेने कहिये"

सबई मिली न s गाओ ,, गांधी बाबा पाछा आओ

 

*शिशिर उपाध्याय , बड़वाह(म.प्र) मो.9926021858

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